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Home अपराध किसानों के आंदोलन में दुष्कर्म कैसे? जानबूझकर चुप रहे योगेन्द्र यादव! होगी पूछताछ

किसानों के आंदोलन में दुष्कर्म कैसे? जानबूझकर चुप रहे योगेन्द्र यादव! होगी पूछताछ

by Khabartakmedia

टिकड़ी बॉर्डर पर किसान आंदोलन में एक युवती के साथ हुए दुष्कर्म का मामला गंभीर हो चुका है। पुलिस ने किसान नेता और स्वराज भारत पार्टी के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव को नोटिस भेजी है। बहादुरगढ़ थाने में योगेन्द्र यादव से मंगलवार यानी 11 मई को पूछताछ होगी। बहादुरगढ़ थाना से योगेन्द्र यादव को इस बाबत एक नोटिस भेजी गई है। नोटिस में कहा गया है कि “इसे अति आवश्यक समझें। लापरवाही की सूरत में आप खुद जिम्मेवार होंगे।” योगेन्द्र यादव समेत कई किसान नेताओं पर इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस ने धारा के 120B, 365, 354, 376D, 342 और 506 के तहत किसान नेताओं पर मुकदमा दर्ज किया है।

टिकड़ी बॉर्डर पर बंगाल से आई युवती के साथ दुष्कर्म मामले में एक एसआईटी गठित की गई है। यह डीएसपी के नेतृत्व में मामले की पड़ताल करेगी। इनके साथ ही साइबर सेल भी मामले की तफ्तीश में जुटी है। मीडिया रपटों के मुताबिक पुलिस ने कुल छह लोगों पर मुकदमा लिखा है। इसमें आरोपी अनिल मलिक, अनूप सिंह, अंकुर सांगवान, कविता आर्य, योगिता सुहाग का नाम शामिल है। इनके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेन्द्र यादव का भी नाम एफआईआर में शामिल है।

क्या है पूरा मामला:

खबरों के अनुसार पीड़िता बंगाल में एक ट्रेड यूनियन की सदस्य हैं। अप्रैल की पहली तारीख को किसान नेता बंगाल पहुंचे थे। यहां केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने सभा की। इसी सभा के दौरान पीड़िता की भेंट अनिल मलिक, अंकुर सांगवान, अनूप सिंह और कविता आर्या से हुई। इन्होंने खुद को किसान सोशल आर्मी नाम के संगठन का सदस्य बताया। पीड़िता की मुलाकात योगिता सुहाग से भी हुई जो कि कुश्ती यूनियन की सदस्य हैं।

इन सभी से मुलाकात के बाद किसी तरह पीड़िता ने टिकड़ी बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल होने पहुंची। 12 अप्रैल को वो टिकड़ी बॉर्डर पहुंच गई। पीड़िता ने बाद में अपने पिता से यह बात बताई कि बंगाल से टिकड़ी आते वक्त ट्रेन में उसके साथ छेड़छाड़ हुई। पीड़िता के पिता ने पुलिस को बताया कि टिकड़ी बॉर्डर पर किसानों की टेंट में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ। पीड़िता ने ये बातें अपने पिता से फोन पर बताई थी। उसने 16 अप्रैल के दिन अपनी आपबीती योगिता और जगदीश बरार को बताई। इसके बाद इनकी सहायता से उसने एक वीडियो बयान भी रिकॉर्ड किया।

योगेन्द्र यादव को मिली जानकारी:

पीड़िता ने इस वीडियो को अपने पिता को भी भेजा था। लेकिन इन सब के बीच 21 अप्रैल को उसे बुखार हो गया। बुखार की खबर पीड़िता के पिता तक पहुंची। पिता ने ही दिल्ली के एक डॉ. अमित को अपनी बेटी की हालत के बारे जानकारी दी। मीडिया रपटों की मानें तो डॉ. अमित ने सारी बातें योगेन्द्र यादव को बताई। लेकिन तभी आरोपियों ने पीड़िता को टिकड़ी बॉर्डर से कहीं और ले जाने की कोशिश की। आरोपी पीड़िता को वहां से लेकर जा भी चुके थे। लेकिन योगेन्द्र यादव की इस चेतावनी पर कि यदि वे वापस नहीं आए तो इसकी सूचना पुलिस को दी जाएगी, पीड़िता को टिकड़ी बॉर्डर पहुंचकर फरार हो गए।

26 अप्रैल को युवती की तबियत ज्यादा बिगड़ने लगी। युवती को कोरोना वायरस का संक्रमण हो गया था। किसान नेता उसे पीजीआई अस्पताल ले गए। हालांकि यहां बेड खाली ना होने की वजह से भर्ती नहीं हो सकी। इसके बाद लड़की को बहादुरगढ़ के एक अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया। 29 अप्रैल को उसके पिता अस्पताल पहुंचे। उसके अगले ही दिन 30 अप्रैल को पीड़िता ने दम तोड़ दिया। किसानों ने पीड़िता की शव को खुली जीप में रखकर शहर में घुमाया और उसे शहीद बताया।

किसान नेताओं पर उठ रहे सवाल:

इस पूरी घटनाक्रम से किसान आंदोलन पर एक अमिट काला धब्बा लग गया है। सवालों के घेरे में संयुक्त किसान मोर्चा के नेता हैं। किसान मोर्चा के बड़े नेताओं को इस मामले की जानकारी हो गई थी। डॉ. अमित के जरिए यह बात योगेन्द्र यादव तक पहुंच चुकी थी। लेकिन इसके बावजूद किसान नेताओं ने पुलिस को सूचना नहीं दी।

संयुक्त किसान मोर्चा के बड़े नेताओं का कहना है कि मामले की जानकारी मिलने पर कार्रवाई की गई थी। संबंधित किसान संगठन का बहिष्कार किया गया था। इसके अलावा उनके टेंट और पोस्टर हटवा दिए गए थे। हालांकि तब भी सवाल उठता है कि किसान नेताओं ने पुलिस को इस मामले से अवगत क्यों नहीं कराया? अब पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। एसआईटी का गठन हो चुका है। मामले की जांच चल रही। पुलिस कल योगेन्द्र यादव से पूछताछ भी करने वाली है। देखना होगा कि ये पूरी शर्मसार करने वाली घटना कौन सी करवट लेती है?

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