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सरकार की गंगा परियोजना काशी और गंगा नदी के रिश्ते के लिए विनाशकारी: कांग्रेस नेता अजय राय

by
Ajay Rai

Varanasi. कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक अजय राय ने शनिवार को वाराणसी में प्रेस कांफ्रेंस की। अजय राय ने इस प्रेस कांफ्रेंस में काशी में चल रहे गंगा नदी से जुड़े परियोजनाओं पर बात की। सरकार के गंगा परियोजनाओं को काशी और गंगा के अलौकिक प्राकृतिक रिश्ते के लिए विनाशकारी करार देते हुए उन्होंने कई आरोप लगाए। उन्होंने सरकार से कई मांगें भी की हैं। साथ ही यह भी कहा है कि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो कांग्रेस इस मुद्दे पर आंदोलन चलाएगी।

अजय राय ने वाराणसी के ललिता घाट के सामने गंगा नदी के तकरीबन सौ मीटर भीतर तक बनाए गए चबूतरे को ध्वस्त करने की मांग की है। साथ गंगा के पूर्वी छोर पर बन रही नहर के काम को स्थगित करने की मांग भी की है। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पूर्वी छोर पर बन रही नहर को लेकर विशेषज्ञों के बीच खुली बहस हो। उसके बाद ही उचित निर्णय लिया जाए।

सरकार की योजनाएं काशी में गंगाजल को प्रदूषित कर रही हैं। साथ ही ये योजनाएं काशी में गंगा के घाटों से गंगा को दूर ले जाने और काशी में गंगा के अर्धचन्द्राकार प्राकृतिक प्रवाह को खत्म कर देंगी, अजय राय ने कहा। अजय राय ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि गंगा के प्रति काशी की जनभावना से जुड़ी इन मांगों को नहीं माने जाने पर कांग्रेस जनान्दोलन के लिए बाध्य होगी।

विशेषज्ञों में हो खुली बहस:

प्रेस कांफ्रेंस में अजय राय ने बताया कि “हमने ये निर्णय काशी, गंगा और नदियों के सरोकारों से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों के परामर्श तथा जनभावनाओं के आधार पर लिया है। तकनीकी विशेषज्ञों की स्पष्ट राय है कि इन परियोजनाओं पर फैसले वैज्ञानिक आधार पर सुविचारित फैसले नहीं हैं। केवल राजनीतिक इच्छा नहीं, उसके साथ खुली विशेषज्ञ बहस के बाद ही यह फैसला होना चाहिये था। क्योंकि गंगा के साथ काशी का रिश्ता संवेदनशील रिश्ता है।”

अजय राय ने नहर निर्माण के लिए सरकार को जलपुरुष राजेन्द्र सिंह, संकट मोचन मंदिर के महंत और दो पीढ़ी से स्वच्छ गंगा के वैज्ञानिक अभियान एवं आन्दोलन से जुड़े आईआईटी के आचार्य प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र, तकनीकी सवाल खड़े करने वाले आईआईटी के सिविल इन्जीनियरिंग विशेषज्ञों तथा काशी की धार्मिक आस्था के प्रतिनिधि शीर्ष धर्माचार्यों के साथ सलाह करने की बात कही है।

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