Latest News
Home ताजा खबर “कोरोना भी एक प्राणी है, वो जीना चाहता है”, उत्तराखंड के पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान!

“कोरोना भी एक प्राणी है, वो जीना चाहता है”, उत्तराखंड के पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान!

by Khabartakmedia

कोरोना संक्रमण के शुरुआती दिनों से ही अजीब अजीब बातें सुनने को मिली हैं। कोरोना वायरस को लेकर कई विचित्र दावे। उससे निपटने के अतरंगी और अवैज्ञानिक सुझाव। केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक में बैठे मंत्रियों ने खूब ज्ञान बांटे हैं इस पर। संक्रमण की पहली लहर के दौरान केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले तो भाभी जी पापड़ लेकर आ गए थे। इसे इत्तेफाक ही समझा जाए कि इस तरह के बेतुके बयान ज्यादातर भाजपा नेताओं से ही सुनने को मिले हैं।

कहीं किसी भाजपा नेता ने गाय के गोबर को घोल कर उसमें नहाने का सुझाव दिया। तो कभी किसी में गौमूत्र सेवन करने की बात कही। हालांकि गौमूत्र पीकर कोरोना भगाने की टेक्निक सबसे ज्यादा ट्रेंड में रही है। पिछले ही दिनों बलिया से भाजपा के विधायक सुरेंद्र सिंह ने भी ये तरकीब अपनाने का सुझाव दिया था। भयंकर महामारी के दौर में ऐसी टिप्पणियां भले ही कुछ लोगों का मनोरंजन करती हो। लेकिन ये है बहुत गंभीर मामला। कई लोग तो इन बातों को इस कदर गंभीरता से प्रचारित करने लगें कि डाक्टरों और विशेषज्ञों ने इसका खंडन करना शुरू कर दिया।

कोरोना जीना चाहता है:

सबसे ताजा बयान दिया है उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने। त्रिवेंद्र सिंह ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कोरोना को लेकर अद्भुत ज्ञान दिया है। ऐसा ज्ञान जिसे प्राप्त करने के उत्तराखंड की पहाड़ियों में बैठकर साधना करनी होगी। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि “कोरोना वायरस एक प्राणी है। हम भी एक प्राणी हैं। हम समझते हैं कि हम ही सबसे ज्यादा बुद्धिमान हैं। लेकिन वो प्राणी भी जीना चाहता है। उसे भी जीने का अधिकार है।”

त्रिवेंद्र सिंह रावत यहीं नहीं रुके। उन्होंने कोरोना के रूप को लेकर भी भारी ज्ञान दे दिया। उन्होंने कोरोना के बदलते रूप के पीछे का महान दर्शन बता दिया। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि “हम उसके (कोरोना वायरस) पीछे लगे हैं। उसने अपने बचने के लिए रूप बादल लिया। वो बहुरूपिया है।”

पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान पर सोशल मीडिया पर खूब ठिठोली हो रही है। लेकिन उनके बयान में जो दर्शन छिपा है उसे कोई भी समझ नहीं पा रहा है। क्योंकि ये ज्ञान है ही इतना महान। ये साधारण मनुष्यों की समझ से परे है। ऐसी दिव्य बातों को दिव्य पुरुष और दिव्य महिलाएं ही समझ सकती हैं।

Related Articles

Leave a Comment