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क्या है उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण बिल 2021-30, क्यों मचा है बवाल? पूरा मामला समझिए

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Uttar Pradesh Population Control Bill. उत्तर प्रदेश में इन दिनों एक विधेयक को लेकर बहस छिड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण बिल 2021-30. यह बिल बेहद सुर्खियों में है। नेता से जनता तक हर कोई इस चर्चा में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस विधेयक को पारित करने की पूरी तैयारी कर ली है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव से ठीक पहले यह विधेयक राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण बिल 2021 का मसौदा तैयार हो चुका है। इस बिल का मसौदा बनाया है उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने। आयोग ने इस बिल को लेकर सुझाव भी मांगे हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग की वेबसाइट (upslc.upsdc.gov.in) पर जाकर कोई भी व्यक्ति अपनी राय दे सकता है। आप चाहें तो आयोग को बता सकते हैं कि इस कानून में कौन सी बातें शामिल की जा सकती हैं या क्या बदलाव किए जा सकते हैं? ताकि उससे सरकार के जनसंख्या नियंत्रण का लक्ष्य पूरा हो सके।

गौरतलब है कि 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस पर योगी आदित्यनाथ सरकार ने नई जनसंख्या नीति का ऐलान कर दिया। सरकार इस नीति को जल्द ही लागू करने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पांच कालीदास मार्ग से यह ऐलान किया। सीएम ने कहा कि “कई दशक से बढ़ती आबादी पर चर्चा हो रही है। बढ़ती आबादी की वजह से समाज में गरीबी समेत कई बड़ी समस्याएं पैदा बढ़ रही हैं।”

Yogi Adityanath
Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री ने कहा कि “उत्तर प्रदेश की जनसंख्या नीति 2021-30 जारी करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है। समाज के सभी तबकों को ध्यान में रखकर प्रदेश सरकार इस नीति को लागू कर रही है।”

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जेपी सिंह ने कहा कि “जनसंख्या नियंत्रण जरूरी है। माना जाता है कि हमारी (भारत की) आबादी 2027 तक चीन की जनसंख्या से भी आगे निकल जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि “अगर हम नई जनसंख्या नीति लागू करते हैं, तब हमारे प्रदेश की आबादी 2052 तक स्थिर रहेगी।

प्रोत्साहित करेगी सरकार:

उत्तर प्रदेश की जनसंख्या फिलहाल लगभग 24 करोड़ बताई जा रही है। रपटों की मानें तो उत्तर प्रदेश की प्रजनन दर 2.7% है। जो कि 2.1% होनी चाहिए। राष्ट्रीय वृद्धि 2.7 फीसदी की तुलना में उत्तर प्रदेश की वृद्धि दर 3.1 फीसदी है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नई जनसंख्या नीति लागू करने का मन बनाया है।

इसी के तहत राज्य सरकार “दो बच्चों की नीति” (Two Child Policy) भी लागू कर सकती है। इस नीति को मानने वालों को सरकार प्रोत्साहित करेगी। जबकि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों को कई सुविधाओं से वंचित रखा जाएगा। इस कानून को तोड़ने वालों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। यानी प्रदेश का कोई भी व्यक्ति जिसके दो से अधिक बच्चे होंगे उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिल सकेगी। यही नहीं इस कानून का उल्लंघन करने वालों के पंचायत चुनाव लड़ने का रास्ता भी बंद हो जाएगा।

ऐसे सरकारी कर्मचारी जिनके सिर्फ दो बच्चे होंगे उन्हें प्रोत्साहन राशि (Incentive) दी जाएगी। जिन सरकारी कर्मचारियों का सिर्फ एक बच्चा होगा उसे भी सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि मिलेगी। साथ ही पूरे कार्यकाल में दो बार अतिरिक्त वेतन वृद्धि भी होगी। इसके अलावा पूरे कार्यकाल के दौरान 12 महीने की छुट्टी भी अधिक दी जाएगी।

सपा सांसद के बयान से विवाद:

सांसद शफीकुर्रहमान बर्क

उत्तर प्रदेश के सम्भल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने जनसंख्या नियंत्रण के मसले पर एक बयान दिया है। जिससे काफी विवाद पैदा हो गया है। शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा है कि “यह कानून कुदरत से टकराने वाला होगा और इस कानून से कोई लाभ नहीं होगा।” शफीकुर्रहमान बर्क ने आगे कहा है कि “दुनिया में कितने लोग पैदा होंगे यह तो कुदरत के हाथ में हैं। तेरे मेरे बस में कुछ नहीं है। इसलिए कुदरत से टकराना नहीं चाहिए।”

सोशल मीडिया पर भी इस बिल को लेकर चर्चा चल रही है। कुछ लोग इस बिल को बेहद जरूरी बता रहे हैं। ऐसे लोगों का तर्क है कि देश में संसाधन सीमित है लेकिन जनसंख्या विस्फोटक रूप से बढ़ती जा रही है। ऐसे में आने वाले भविष्य में देश के सामने भारी संकट पैदा हो जाएगी। इसलिए जनसंख्या नियंत्रण कानून देश की जरूरत है।

दूसरी ओर कुछ लोग कानून बनाकर जनसंख्या नियंत्रित करने की कवायद को गलत बता रहे हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि बच्चे पैदा करना किसी भी दंपत्ति का निजी अधिकार है। उसमें किसी सरकार को हस्तक्षेप नहीं करनी चाहिए। कानून के जरिए जबरदस्ती यह थोपा नहीं जाना चाहिए।

इन तमाम बहसों के बीच भारतीय जनता पार्टी की सरकार वाली उत्तर प्रदेश और असम ने जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाने का मन बना लिया है।

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