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भाजपा की खींचातानी पर अखिलेश यादव का तंज, “दिल्ली व लखनऊ के बीच फंस गए दूत”

by Khabartakmedia
AKHILESH YADAV

Uttar Pradesh Politics. उत्तर प्रदेश में इन दिनों राजनीतिक बयार तेज हो चली है। वजह है सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर की हलचल। भाजपा संगठन और योगी मंत्रिमंडल में बदलाव के संकेतों ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। दिल्ली और लखनऊ के बीच चल रही कशमकश ने विपक्षी दलों को एक मौका भी दे दिया है। इस मौके को भूना रहे हैं सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव।

अखिलेश यादव ने बुधवार यानी आज शाम एक ट्वीट किया है। भाजपा में मची खलबली पर अखिलेश यादव ने तंज कसा है। उन्होंने लिखा है कि,

“दिल्ली व लखनऊ के बीच फँस गये दूत
इधर एक को मनाते हैं तो दूजे जाते रूठ
दरार-रार पाटने के वास्ते ट्वीट करते झूठ”

बीएल संतोष के ट्वीट पर इशारा:

अखिलेश यादव का ट्वीट सीधे सीधे बीएल संतोष की एक ट्वीट की ओर इशारा कर रहा है। उन्होंने आज सुबह एक ट्वीट किया था। जिसमें सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ के कोविड प्रबंधन की जमकर तारीफ की गई है। उन्होंने लिखा है कि “पांच हफ्तों में योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश ने कोरोना के नए मामलों को 93 फीसदी तक कम किया है। याद रखें कि यह 20 करोड़ जनसंख्या वाला राज्य है।”

बीएल संतोष भाजपा संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं। बीएल संतोष तीन दिनों से लखनऊ आए हुए थे। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक उन्हें भाजपा संगठन में बदलाव और योगी मंत्रिमंडल के विस्तार का मसला हल करने के लिए भेजा गया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा आलाकमान संगठन और सरकार की कमजोरियों को दूर करना चाहती है। कई समीकरण तय किए जाने हैं। इसी काम के लिए बीएल संतोष को दिल्ली से लखनऊ भेजा गया था।

माना जा रहा है कि बीएल संतोष के इसी ट्वीट पर अखिलेश यादव तंज सामने आया है।

अरविंद शर्मा पर भीतरखाने रार:

इन तमाम राजनीतिक बयानबाजियों की जड़ अरविंद कुमार शर्मा तक पहुंचती है। पूर्व नौकरशाह और नए नवेले एमएलसी अरविंद कुमार शर्मा। ये वही अरविंद शर्मा हैं जिन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बेहद करीबी माना जाता है। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब से अरविंद शर्मा उनके साथ काम कर रहे हैं। 2014 में मोदी प्रधानमंत्री बनकर दिल्ली पहुंचे। साथ साथ अरविंद शर्मा भी गुजरात से दिल्ली आ गए।

ज्यादा दिन नहीं हुए जब अरविंद शर्मा ने अपने पद से हमेशा के लिए छुट्टी ले ली। इसके बाद वे राजनीतिक जमीन पर उतर गए। भाजपा आलाकमान ने उन्हें लखनऊ भेजा। यहां उन्हें एमएलसी बनाया गया।

योगी मंत्रिमंडल में अरविंद शर्मा:

राजनीतिक बुझवईया बता रहे हैं कि अरविंद कुमार शर्मा जल्द ही योगी मंत्रिमंडल का हिस्सा बन सकते हैं। भाजपा शीर्ष नेतृत्व उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी देना चाहता है। लेकिन ये बात योगी आदित्यनाथ को नागवार गुजर रही है। माना जाता है कि योगी आदित्यनाथ और अरविंद कुमार शर्मा के बीच पटरी नहीं जमती है। यही वजह है कि अरविंद शर्मा को लेकर भाजपा में भूचाल आया हुआ है। हालांकि बीते कुछ सालों में भाजपा की राजनीतिक शैली ऐसी रही है कि भीतर लगे आग का धुआं भी साफ-साफ बाहर नहीं आ पाता है। लेकिन इस बार ये राजनीतिक आग इतनी तेज है कि धुआं दिखने लगा है।

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