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उत्तर प्रदेश चुनाव पर मायावती के बाद असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा ऐलान, सीटों पर खोला पत्ता!

by
Asaduddin Owaisi

Uttar Pradesh Politics. उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव करीब आते ही सियासी चहलपहल बढ़ गई। सभी राजनीतिक दलों ने जमीन पर उतरने से पहले की तैयारियां शुरू कर दी हैं। हर तरह की योजनाओं पर विचार विमर्श चल रहा है। क्योंकि बात देश के सबसे बड़े राजनीतिक महत्व वाले सूबे की है। रविवार को उत्तर प्रदेश के चुनाव को लेकर दो बड़े ऐलान हुए हैं। एक घोषणा कभी यूपी के सियासत में एक व्यापक प्रभाव रखने वाली मायावती ने की है। तो दूसरा, यूपी में हाथ आजमाने आ रहे असदुद्दीन ओवैसी ने की है।

AIMIM पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आज एक ट्वीट कर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारे में गरमी ला दी। ओवैसी ने ऐलान किया है कि यूपी चुनाव में उनकी पार्टी कुल 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। AIMIM पूरे उत्तर प्रदेश के सौ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। ओवैसी ने बताया है कि इसके लिए उम्मीदवारों को चुनने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

असदुद्दीन ओवैसी ने साफ किया है कि यूपी चुनाव में फिलहाल किसी पार्टी से गठबंधन को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। बता दें कि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा थी कि ओवैसी और मायावती की पार्टी एक साथ आ सकती है।

हालांकि ओवैसी ने ओमप्रकाश राजभर के साथ होने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि “हम ओपी राजभर साहब की भागीदारी संकल्प मोर्चा के साथ हैं।

मायावती का खंडन:

गौरतलब है कि मीडिया में ऐसी खबरें चल रही थीं कि AIMIM और बसपा का गठबंधन हो सकता है। मायावती ने ऐसी खबरों का खंडन किया है। मायावती ने आज एक ट्वीट कर कहा है कि “इसमें रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है। यह खबर पूर्णतः गलत, भ्रामक, व तथ्यहीन है।”

मायावती ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी। यानी कि इस बार चुनावी मैदान में बसपा अकेले ही उतरेगी।

मायावती ने अपनी ट्वीट में लिखा है कि “वैसे इस सम्बन्ध में पार्टी द्वारा फिरसे यह स्पष्ट किया जाता है कि पंजाब को छोड़कर, यूपी व उत्तराखण्ड प्रदेश में अगले वर्ष के प्रारंभ में होने वाला विधानसभा का यह आमचुनाव बीएसपी किसी भी पार्टी के साथ कोई भी गठबन्धन करके नहीं लड़ेगी अर्थात् अकेले ही लड़ेगी।”

उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प होने वाला है। किसान आंदोलन, कोरोना प्रबंधन, बेरोजगारी जैसे मुद्दों के चलते प्रदेश में भाजपा की साख गिरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कारण भाजपा में खींचतान चल रही है। सपा, कांग्रेस और बसपा तीनों ही विपक्षी दल अकेले चुनाव लड़ने जा रही हैं। कोई भी दल किसी बड़ी पार्टी से साठगांठ करता हुआ नहीं दिख रहा है। ऐसे में सूबे में कौन से सियासी समीकरण पैदा होते हैं देखना होगा।

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