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जितिन प्रसाद के भाजपा जाते ही ब्राह्मण चेतना परिषद में टूट, BJP को बताया ब्राह्मण विरोधी

by Khabartakmedia
Jitin Prasad and Piyush Goyal

Uttar Pradesh Politics. जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) ने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया है। अब जितिन प्रसाद ने अपने हाथ में कमल थाम लिया है। यानी कि भाजपा में शामिल हो गए हैं। इसके साथ ही जितिन प्रसाद के ब्राह्मण चेतना परिषद् में टूट पड़ गई है। परिषद के उन्नाव जिला के अध्यक्ष कमलेश तिवारी (Kamlesh Tiwari) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

कमलेश तिवारी ने ब्राह्मण चेतना परिषद के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष को अपना त्याग पत्र सौंपा है। कमलेश तिवारी ने इस पत्र में अपने इस्तीफा देने का कारण भी बताया है। उन्होंने सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ब्राह्मण विरोधी बताया है। कमलेश तिवारी का कहना है कि ब्राह्मण चेतना परिषद के संरक्षक जितिन प्रसाद एक ब्राह्मण विरोधी दल में शामिल हो गए हैं। इसलिए वो परिषद में अपने पद का त्यार कर रहे हैं।

कमलेश तिवारी अपने पत्र में लिखते हैं कि,

“ब्राह्मण चेतना के संरक्षक श्री जितिन प्रसाद जी ने ब्राह्मण विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है, यह हम जैसे सामान्य कार्यकर्ताओं के लिए न केवल दुखद अपितु अपमानित करने जैसा कार्य है। क्योंकि इस संस्था का गठन मौजूदा सरकार के ब्राह्मण विरोधी रवैए को देखते हुए किया गया था।”

उन्होंने आगे लिखा है कि “मकसद था कि सताए हुए ब्राह्मणों को उनका अधिकार दिलाना और अब हम उसी घर में सदस्य बन रहे हैं जहां हमारी पूछ नहीं है। तो यह हमारे ही नहीं समस्त ब्राह्मणों का अपमान है।”

सियासी तापमान में भारी उछाल:

जितिन प्रसाद उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से आते हैं। वो कांग्रेस के पुराने नेता रहे हैं। जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के नेता थे। वो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव के सलाहकार थे। जितिन प्रसाद कांग्रेस की सरकार में सबसे युवा केंद्रीय मंत्री बनाए गए थे। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के बचे खुचे बड़े चेहरों में जितिन प्रसाद शुमार थे।

गत बुधवार यानी 9 जून को जितिन प्रसाद कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले गए। दिल्ली में भाजपा कार्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। दिल्ली में जितिन प्रसाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मिले।

जितिन प्रसाद के इस कदम में सियासी गलियारों की व्यस्तता बढ़ा दी। कई तरह की चर्चाएं और कानाफूसी शुरू हो गई। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि भाजपा ने यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जितिन प्रसाद को अपने साथ लाया है। इस बीच जातिगत गोटी खूब बैठाई गई।

उत्तर प्रदेश में भाजपा से ब्राह्मणों का गुट नाराज़ है। इस नाराजगी को दूर करने के लिए जितिन प्रसाद को भाजपा में लाया गया है। जितिन प्रसाद उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को एकजुट करने की कवायद बीते कुछ समय से कर रहे हैं। इसीलिए ब्राह्मण चेतना परिषद का गठन भी किया गया था। देखना होगा कि चुनाव तक और किस किस तरह तिकड़म देखने को मिलते हैं? चुनावी मौसम अभी कई गुल खिलने बाकी हैं।

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