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दिल्ली में अमित शाह से मिले योगी आदित्यनाथ, भेंट की ‘समाधान’ की किताब! कल होगी मोदी से मुलाकात

by Khabartakmedia
Amit Shah and Yogi Adityanath

Yogi Adityanath Delhi Visit. गुरुवार यानी 10 जून को दिल्ली में एक खास मुलाकात हुई। इस मुलाकात पर पूरे दिन मीडिया और राजनीति से जुड़े लोगों की नजर गड़ी रही। दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात हुई। भारतीय जनता पार्टी के इन दो नेताओं की मुलाकात यूं ही नहीं हुई। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा में चल रहे अंदरखाने तिकड़मबाजी को लेकर यह भेंट हुई है।

योगी आदित्यनाथ आज दोपहर लखनऊ से दिल्ली के लिए रवाना हुए। दोपहर तीन बजे के आसपास योगी गाजियाबाद के हिंडन हवाई अड्डा पर उतरे। यहां से वे सड़क के रास्ते दिल्ली के यूपी सदन पहुंचे। इसके बाद लगभग 4 बजे उनकी मुलाकात गृह मंत्री अमित शाह से हुई। योगी आदित्यनाथ ने अमित शाह को एक पुस्तक भेंट की। पुस्तक का नाम है “प्रवासी संकट का समाधान”।

पीएम से होगी भेंट:

योगी आदित्यनाथ ने आज अमित शाह के साथ लंबी मुलाकात की। तकरीबन डेढ़ घंटे तक दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई। अब शुक्रवार यानी 11 जून का दिन बेहद खास होने वाला है। कल योगी आदित्यनाथ भारत के प्रधानमंत्री और भाजपा के सर्वेसर्वा नेता नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी और सीएम योगी के बीच कल की भेंट सुबह 11 बजे हो सकती है।

इसके बाद सीएम योगी भाजपा के एक और शीर्ष नेता से मिलेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ कल ही उनकी भेंट होगी। इन दोनों नेताओं के बीच 12:30 दोपहर मेल मिलाप हो सकता है।

क्या है चर्चा:

योगी आदित्यनाथ और दिल्ली में बैठे भाजपा के आलाकमान के बीच की यह भेंट बेहद खास है। कम से कम भाजपा के लिए तो खास है ही। राजनीति के जानकार बता रहे हैं। लखनऊ और दिल्ली के बीच की कशमकश को निपटाने के लिए मुलाकातों का यह सिलसिला चला रहा है।

गौरतलब है कि इन दिनों उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार और संगठन के बीच भीतरखाने खूब खींचतान चल रही है। हालांकि भाजपा की जो राजनीतिक शैली रही है उस वजह से ये टकराव बेपर्दा नहीं हो पा रहा है। लेकिन दिल्ली से भाजपा संगठन के महासचिव का लखनऊ आना और अब योगी का दिल्ली जाना, इस बात की गवाही दे रहा है।

भाजपा इन सारे मसलों को 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सलटा देना चाहती है। ताकि चुनाव के दिनों में उसे ये भीतरी लड़ाई महंगी ना पड़ जाए। देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली से योगी आदित्यनाथ किस तरह लौटते हैं? भाजपा आलाकमान उन्हें किन निर्देशों के साथ विदा करती है? योगी आदित्यनाथ की बढ़ती ताकत और नरेंद्र मोदी से हो रही उनकी तुलना पर भाजपा की तिकड़ी (मोदी, शाह और नड्डा) क्या रुख अख्तियार करते हैं?

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