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जेएनयू के दो बार छात्रसंघ अध्यक्ष रहे चंद्रशेखर की कहानी, जिसे शहाबुद्दीन के गुर्गों ने गोलियों से भून डाला

by Khabartakmedia

ज 31 मार्च, 2021 है। आज से चौबीस साल पहले आज ही के दिन की बात है। एक युवा नेता जो अभी-अभी छात्र राजनीति को अपने ढंग से परिभाषित करने के बाद आया था। मंच पर भाषण दे रहा था। मंच सजी थी बिहार के जिला सीवान में। बिहार में उस दिन एक “बंद” का आह्वान किया गया था। उसी बंद के तहत सीवान में एक नुक्कड़ नाटक हो रहा था। मंच पर मौजूद थे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के दो बार के छात्रसंघ अध्यक्ष और CPIML के युवा नेता चंद्रशेखर प्रसाद उर्फ चंदू। अचानक कुछ लोग मंच के करीब पहुंचे। AK47 निकाली और अंधाधुंध गोलियां चलाने लगे। इन गोलियों ने तीन लोगों की जान ले ली। जिनमें एक थे चंद्रशेखर प्रसाद “चंदू”।

चंदू के अलावा उन्हीं की पार्टी के एक अन्य कार्यकर्ता की भी मौत हो गई। कहा जाता है कि 31 मार्च, 1997 के दिन हुआ ये हमला एक राजनीतिक हत्या थी। कहा जाता है कि गोलियां चलाने वाले लोग राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के माफिया नेता शहाबुद्दीन के गुर्गे थे। चंदू की हत्या के बाद देशभर में छात्रों ने आंदोलन चलाया। सीबीआई जांच की मांग हुई। मामला लंबा खींचा और 2012 में सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। फ़रवरी, 2012 में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिली। मार्च, 2012 में एक अन्य आरोपी को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इस फैसले से सीपीआईएमएल और चंदू के समर्थक संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले के सबसे बड़े गुनहगार यानी कि राजद नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन को सजा नहीं मिली।

पढ़ाई से लड़ाई तक:

चंद्रशेखर प्रसाद का जन्म बिहार के सीवान जिले में हुआ था। वो जब लगभग आठ साल के थे तभी उनके पिता की मौत हो गई थी। उसके बाद उनकी देखभाल मां कौशल्या देवी ने ही की। आर्मी स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद चंदू का चयन एनडीए में हुआ। दो साल तक पुणे में प्रशिक्षिण लेने के बाद मन नहीं लगने पर चंदू लौट आए। उसके बाद पटना विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया। यहीं वो ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन से जुड़े। यहां जब पढ़ाई पूरी हो गई तब दिल्ली का रुख किया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रवेश पाकर ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन से जुड़े। जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में हिस्सा लेकर चंद्रशेखर उपाध्यक्ष पद पर चुने गए। लेकिन चंदू यहीं नहीं रुके। इसके बाद दो बार जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष भी बने। अपने छात्र राजनीति में उन्होंने कई बड़े आंदोलन किए। चंद्रशेखर को भारतीय राजनीति में उभरते हुए बड़े नेता के तौर पर देखा जा रहा था।

चंद्रशेखर प्रसाद यहीं से बिहार के सीवान लौटे। वो लोगों में राजनीतिक माफियाओं के खिलाफ जागरूकता फैला रहे थे। इसी बीच बिहार में बंद का आह्वान हुआ। सीवान जिले के जेपी रोड पर नुक्कड़ नाटक हुई। यहां चंदू भी शामिल हुए। लेकिन ये नुक्कड़ नाटक और बंद चंद्रशेखर प्रसाद उर्फ चंदू के जीवन की आखिरी राजनीतिक गतिविधि बन गई।

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