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“जान जनता की हथेली पर है, मेरे राजा अभी रैली पर हैं”

by Khabartakmedia

Munawwar Faruqui new poem on current situation.

“लगता है हम सुपर पॉवर बन चुके हैं”

जल रहे हैं श्मशान तो तामीर हैं कब्रें कहीं
इस दलाली के दौर में दब चुकी हैं सच्ची खबरें कहीं
जान जनता की हथेली पर है, मेरे राजा अभी रैली पर हैं
अगर सच कुछ अख़बार कह देंगे, ये उन्हें भी गद्दार कह देंगे
ये मांगते हुए कागज खुद का वजूद भूल चुके हैं
लगता है हम सुपर पॉवर बन चुके हैं।

कोई कुंभ पर उंगली उठा रहा है तो कोई जमात पर थूक चुका है
तुम्हें जात के नाम पर गुमराह कर कोई सोने की चिड़िया लूट चुका है
आज गरीब तरस रहे हैं बिस्तर को और बड़े अस्पताल की लग्जरी है उस मिनिस्टर को
लड़ते हुए एक दूसरे से हम इंसानियत का धर्म भूल चुके हैं
लगता है हम सुपर पॉवर बन चुके हैं

वादा हवा से ऑक्सीजन निकालने का था,
वादा इस देश से गरीबी मिटाने का था,
सांसों की किल्लत से वो कंगाल गरीब मिट रहा है
और इन्हें बंगाल गरीब दिख रहा है

सुना है दस गुना के दाम पर बिक रही हैं दवाइयां जान बचाने को
जो बेचने वाले उनका जमीर मर चुका है
लगता है हम सुपर पॉवर बन चुके हैं।

यह कविता मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी द्वारा लिखी गई है। मुनव्वर फारूकी ने इस कविता को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो के जरिए पोस्ट किया है।
ये रहा लिंक:

https://www.instagram.com/tv/CNz34REAjOa/?igshid=87paggl4bife

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