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Home महत्वपूर्ण दिवस नहीं पूछे गए ये सवाल तो बेकार जाएगी पुलवामा के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि!

नहीं पूछे गए ये सवाल तो बेकार जाएगी पुलवामा के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि!

by Khabartakmedia

14 फरवरी, 2019 का दिन था। सूरज अस्त होने की तैयारी में था। तभी न्यूज चैनलों पर ब्रेकिंग खबर आई। ऐसा समाचार जिसने भारतीयों का दिल तोड़ दिया। हर कोई हक्का-बक्का था। हलकान मचा हुआ था। देश का हर नागरिक आवाक था। क्योंकि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुआ था सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के काफिले पर हमला। जिसने एक झटके में सीआरपीएफ के 40 जवानों को शहीद कर दिया था। न जाने कितने घायल हो गए।

कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय सेना पर की गई 1989 के बाद से सबसे बड़ा हमला था यह। सीआरपीएफ का एक काफिला गुजर रहा था राष्ट्रीय राजमार्ग 44 से। अचानक एक कार आती है और जवानों की एक बस से टकरा जाती है। इस टक्कर के साथ ही विस्फोट हो जाता है। क्योंकि कार में 300 किलो आरडीएक्स भरा हुआ था। इस कार को एक 22 साल का आतंकवादी आदिल अहमद दार चला रहा था। आदिल जम्मू कश्मीर के काकापोरा का रहने वाला था। इस हमले में दार की भी मौत हो गई। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने ली थी।

पुलवामा हमले का घटनास्थल

खबरों के अनुसार जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आदिल अहमद दार को पिछले 1-2 सालों में 6-7 बार गिरफ्तार कर चुकी थी। हालांकि हर बार बगैर किसी चार्ज के उसे छोड़ दिया जाता था। दार के घरवालों के अनुसार वह लगभग एक साल पहले घर से गायब हो गया था। संभवतः आदिल उस समय जैश के संपर्क में चला गया था।

क्या हैं सवाल, जिनका नहीं मिला जवाब:

पुलवामा हमले की जांच के लिए नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की टीम गठित की गई थी। जांच कहां तक पहुंचा इसकी कोई जानकारी नहीं है। हालांकि कुछ महीने पहले यह खबर आई थी कि एनआईए ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है। लेकिन अभी तक कुछ सवालों के जवाब नहीं मिल सके हैं और जो लगभग लोगों के दिमाग से गायब हो चुके हैं। इस दिन मोमबत्तियां जलाकर शहीद जवानों को देश भर में याद किया जा रहा है। लेकिन कुछ सवाल हैं जो इस अधूरी श्रद्धांजलि को पूरा करते हैं।

पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देते पीएम मोदी की तस्वीर

जिस आरडीएक्स का इस्तेमाल इस हमले के लिए हुआ था, वो कहां से आया था? जब सीआरपीएफ का इतना बड़ा काफिला गुजर रहा था तब बीच में एक अनजान कार कैसे आ गई? जबकि ऐसी स्थिति में आम आवागमन को रोक दिया जाना चाहिए। खासकर जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य में। पुलवामा हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के डीएसपी दविंदर सिंह का नाम चर्चा में आया था। दविंदर सिंह को आतंकी संगठन हिजबुल के दो सदस्यों को अपनी गाड़ी में ले जाते हुए पकड़ा गया था। पुलवामा हमले में दविंदर सिंह की भूमिका को लेकर बाद में खूब हंगामा हुआ था। दविंदर सिंह को डीएसपी के पद से हटाया गया था और जेल भी भेज दिया गया था। हालांकि बाद में उसे अदालत से बेल मिल गई थी। क्योंकि दिल्ली पुलिस उसके खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दायर नहीं कर सकी थी।

पुलवामा में भारत के लगभग सभी राज्यों के जवान शहीद हुए थे। अकेले उत्तर प्रदेश से 12 जवान शहीद हो गए थे। यह हमला आतंकियों के लिए बड़ी सफलता थी। तो वहीं भारतीय इंटेलिजेंस के लिए घातक नाकामी। क्योंकि इसे सिर्फ एक आतंकी ने बड़े आसानी के साथ अंजाम दे दिया। अंजाम ये हुआ कि भारत के चालीस सपूत शहीद हो गए। इस मामले में जो सवाल उभर कर सामने आते हैं उनका जवाब बहुत जरूरी है। इन प्रश्नों का हल होना इसलिए भी जरूरी है ताकि भविष्य में फिर कभी पुलवामा जैसी घटना दोहराई न जा सके।

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