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अरबपतियों ने तालाबंदी में खूब बढ़ाई दौलत, ऑक्सफैम की रिपोर्ट आपके होश उड़ा देगी!

by Khabartakmedia

पूंजीवादी व्यवस्था की खूब आलोचना होती है। कहने वाले कहते हैं कि इसमें अवसर की समानता नहीं होती है। एक खाई होती है गरीब और अमीर के बीच। एक ऐसा अंतर जो समय के साथ बढ़ता ही चला जाता है। अमीर की अमीरी परवान चढ़ने लगती है और गरीब गरीबी के जंजाल में फंसते जाता है। अर्थशास्त्र में इसे आर्थिक विषमता कहा जाता है। विषमता, जिसका महत्व हमारी सोच से भी अधिक है। ऑक्सफैम की हालिया रिपोर्ट इन बातों को समझाने में कारगर साबित होगी।


एक साल पहले अचानक दुनिया भर में एक वायरस अपना घर बनाने लगता है। जिससे हर कोई परिचित है, कोरोना वायरस। दुनिया भर के लोग इसकी चपेट में आने लगे। संक्रमण की गति जब तेज हुई तो इससे निपटने के उपाय किए जाने लगे। कई देशों ने तालाबंदी को समाधान समझा। भारत ने भी लॉक डाउन लगा दिया, पूरे देश में। कई महीनों तक यह जारी रहा। लेकिन इस दौरान हजारों बड़ी कंपनियां बंद होने के कगार पर आ गईं। सैकड़ो बंद भी हो गए। करोड़ों लोगों की नौकरियां चली गईं। सब काम ठप। लोगों की आर्थिक हालात बद से बदतर होती चली गई। इस स्थिति पर सामान्य बातचीत तो होती रही, कुछ खबरें भी सुनने को मिली। लेकिन कोई मुकम्मल शोध होना बाकी था। अब एक रिपोर्ट सामने आई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर (thefederal.com)

ऑक्सफैम की रिपोर्ट:

ऑक्सफैम नाम की एक संस्था है, जिसने एक शोध किया है। ताकि पता लगाया जा सके कि तालाबंदी ने आर्थिक विषमता को किस तरह से बढ़ाया है। शोध में जो निष्कर्ष निकल कर सामने आया है वो हैरान कर देने वाला है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक “भारत के अरबपतियों की संपत्ति 35 फीसदी बढ़ गई है। वहीं देश के 84 फीसदी परिवारों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।” रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल मार्च महीने के बाद से “भारत के 100 अरबपतियों ने जितनी संपत्ति कमाई है उससे देश के 13.8 करोड़ गरीब लोगों को लगभग 94 हजार रुपए का चेक दिया जा सकता है।” इसे आसान भाषा में समझिए। यदि 13.8 करोड़ लोगों को 94 हजार रुपए का चेक बांटा जाए, तो जितना पैसा खर्च होगा उतना देश के अरबपतियों ने मार्च के बाद से कमाया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर (indiatoday.in)

हर घंटे लाखों ने गंवाई नौकरी:

ऑक्सफैम की रिपोर्ट से पता चला है कि अप्रैल महीने में हर घंटे 1.7 लाख लोग अपनी नौकरी गंवा रहे थे। जबकि मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, शिव नादर, सायरस पूनावाला, उदय कोटक, अजीम प्रेमजी, सुनील मित्तल, कुमार मंगलम बिरला, लक्ष्मी मित्तल और राधाकृष्ण दमानी जैसे अरबपतियों की संपत्ति तालाबंदी के दौरान बेहद तेजी से बढ़ी है। ये आंकड़े भारत में लॉक डाउन के दौरान बढ़ी बेरोजगारी को दर्शा रही हैं। साथ ही बता रही हैं कि कैसे इस दौरान आर्थिक विषमता भयावह रूप से बढ़ी है।
गौरतलब है कि बगैर योजना बनाए देश में लॉक डाउन लगाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की जमकर आलोचना हो रही थी।

तालाबंदी ने सबसे ज्यादा मुसीबत असंगठित मजदूरों के लिए खड़ा किया था। सारी फैक्ट्रियों के बंद पड़ने से कामगार सड़क पर आ गए। महीनों तक अपने काम से दूर रहे, निकाल दिए गए। हर क्षेत्र में लाखों की संख्या में काम करने वालों छंटनी की गई। हालांकि तमाम सच्चाइयों से उलट मोदी सरकार यह दावा करती रही की स्थिति काबू में है। तालाबंदी ने लंबे समय के लिए देश को एक आर्थिक ब्लैकहोल में धसा दिया है। जिससे उबर पाना आसान नहीं है। ऐसा लगता है कि आर्थिक विषमता ने अपनी जड़ें और भी मजबूत कर ली हैं। अब यह कहना समीचीन होगा कि “ऊंचे मकानों की ऊंचाई बढ़ती जा रही है, झोपड़ियां जमीन धर रहे हैं।”

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