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वैक्सीन बनाने वाली Serum Institute ने बताया, भारत सरकार ने कोरोना की टीका विदेश क्यों भेजी?

by Khabartakmedia

भारत में कोरोना वैक्सीन बनाने वाली कंपनी Serum Institute Of India (SII) ने मंगलवार को एक बयान जारी किया है। SII ने भारत द्वारा विदेशों में कोरोना वैक्सीन भेजे जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। SII ने अपनी ओर से बताया कि भारत सरकार ने दूसरे देशों को कोरोना की वैक्सीन किस वजह से भेजी। SII ने कहा है कि “भारत सहित पूरी दुनिया के लिए कोरोना का संकट गहरा रहा है। पिछले कुछ दिनों से भारत सरकार और भारतीय टीका निर्माताओं द्वारा कोविड वैक्सीन विदेशों में भेजने को लेकर खूब चर्चा हुई है। इसलिए जरूरी है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हम कुछ पहलुओं पर ध्यान दें।”

SII ने कहा है कि “जनवरी 2021 में हमारे पास टीके का विशाल भंडार था। हमारा टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक शुरू हो गया था। उस वक्त कोरोना के मामले अपने निचले स्तर पर थे।” बयान में आगे कहा गया है कि “उसी दौरान दुनिया के कई देशों में कोविड का संकट गंभीर था। कई देशों को मदद की जरूरत थी। हमारी सरकार ने ऐसे समय में जितना संभव हुआ उतना मदद किया।”

कंपनी का कहना है कि “हमें यह भी समझना चाहिए कि यह महामारी भौगोलिक या राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। हम तब तक सुरक्षित नहीं होंगे जब तक कि वैश्विक स्तर पर हर कोई इस वायरस को हराने में सक्षम नहीं हो जाता।” दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और किसी सामान्य समझ रखने वाले व्यक्ति का भी यही मानना है। कोरोना वायरस को जब तक वैश्विक रूप से काबू में नहीं किया जाता, तब तक कोई भी देश सुरक्षित नहीं है।

वैश्विक करार है मुख्य कारण:

इसके बाद SII के बयान का बेहद जरूरी हिस्सा आता है। कंपनी ने बताया है कि “हमारे वैश्विक गठजोड़ के तौर पर COVAX के प्रति हमारी प्रतिबद्धता थी। ताकि इस महामारी को समाप्त करने के लिए विश्व स्तर पर टीकों का वितरण कर सकें।” वैक्सीन के निर्यात को लेकर जब खूब बवाल शुरू हुआ तब भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक बयान दिया था। पात्रा ने कहा था कि “जितने भी वैक्सीन देश से बाहर भेजे गए हैं उसका अस्सी फीसदी हिस्सा वैक्सीन निर्माता कंपनी के व्यावसायिक करारों के तहत गई है।” यानी कि भारत में कोरोना की टीका बना रही कंपनियों के विदेशी कंपनियों के साथ वायवासिक करार थे। जिसके चलते बड़ी मात्रा में वैक्सीन का निर्यात हुआ।

हालांकि भारत सरकार और अब SII वैक्सीन के निर्यात को मानवता की सेवा बता रहा है। सीरम ने आज अपने बयान में कहा है कि “हमने भारत के लोगों की कीमत पर वैक्सीन का निर्यात नहीं किया है।” सीरम का यह बयान विडंबनाओं से भरा हुआ है। भारत के कई राज्यों में टीकाकरण केंद्र इसलिए बंद हो गए हैं क्योंकि टीके की भारी किल्लत है। लेकिन बड़ी मात्रा में दूसरे देशों में वैक्सीन भेजे गए हैं। तो क्या यह भारत के लोगों की कीमत पर टीके का निर्यात नहीं है? सबसे बड़ा सवाल है कि भारत सरकार और भारतीय वैक्सीन निर्माता कंपनियों ने भारत को प्राथमिकता क्यों नहीं दी? भारत में पर्याप्त मात्रा में टीका का भंडारण किए बगैर दूसरे देशों में वैक्सीन भेजना कहां तक ठीक था?

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