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दिल्ली के दूत ने बढ़ाई लखनऊ की चिंता, जान लीजिए कौन हैं अरविंद कुमार शर्मा

by Khabartakmedia

इस समय जाड़े का मौसम अपने चरम पर है। ठंडी ने सबकी हड्डियां हिला रखी है। लेकिन दिल्ली और लखनऊ की राजनीतिक गलियों में भयानक गर्मी छाई हुई है। हालांकि लखनऊ के लोगों को पसीना ज्यादा हो रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार के उड़नखटोले पर दिल्ली की गद्दी पर विराजे मोदी और शाह की जोड़ी ने ब्रेक लगाने के लिए एक पैंतरा खेला है। उत्तर प्रदेश में एक छत्र सरकार चला रहे योगी आदित्यनाथ पर दिल्ली दरबार ने लगाम लगाने की कोशिश की है। रूपक अलंकार को थोड़ा आराम देकर सीधे तौर पर जान लीजिए कि माजरा क्या है।
दरअसल योगी आदित्यनाथ और उनकी मंत्रिमंडल पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में बैठे भाजपा आलाकमान के लिए नासूर बनी हुई है। ऐसा कहा जा रहा था कि लखनऊ की हालिया सरकार दिल्ली के हाथों से निकलती जा रही है। इसलिए दिल्ली से एक दूत को उत्तर प्रदेश भेजा गया है। वो शख्स जो नरेंद्र मोदी के इशारे पर यूपी की राजनीति में आया है उसका नाम है अरविंद कुमार शर्मा। अरविंद शर्मा को नरेंद्र मोदी का बेहद करीबी कहा जाता है। अरविंद कुमार शर्मा को भाजपा ने उत्तर प्रदेश में एमएलसी प्रत्याशी के रूप में उतारा है। हालांकि राजनीति को समझने वाले कह रहे हैं कि शर्मा बहुत दूर तक जाएंगे क्योंकि उनका संबंध बहुत ऊपर से है। अरविंद शर्मा जैसे यूपी पहुंचे योगी मंत्रिमंडल के कान खड़े हो गए। कहा जा रहा है कि अरविंद शर्मा को सिर्फ एमएलसी प्रत्याशी के रूप में देखा जाना बड़ी चूक होगी। शर्मा दिल्ली की वो रस्सी हैं जो लखनऊ को बांधे रखेगी।
सियासी पंडित इन गतिविधियों को लेकर गंभीर हैं और कई प्रकार की व्याख्याएं गढ़ रहे हैं। अब आने वाला समय बताएगा कि क्या सचमुच अरविंद शर्मा दिल्ली की हनक हैं जिसे लखनऊ को दिखाया गया है।

अरविंद कुमार शर्मा (file photo)

कौन हैं अरविंद कुमार शर्मा?

अरविंद कुमार शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के मऊ में हुआ था। सन् 1988 बैच के आईएएस हैं। लेकिन इनका सबसे ख़ास परिचय ये है कि इन्होंने गुजरात में लंबे समय तक नरेंद्र मोदी के साथ काम किया है। तब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुखिया हुआ करते थे, मतलब मुख्यमंत्री। 2001 से 2013 तक अरविंद कुमार शर्मा ने गुजरात के सीएमओ में काम किया। लेकिन जब नरेंद्र मोदी देश के मुखिया, यानी कि प्रधानमंत्री बने तब अरविंद शर्मा दिल्ली के पीएमओ लाए गए। पीएमओ में पहले संयुक्त सचिव और फिर सचिव बने। आधिकारिक तौर पर अरविंद शर्मा की रिटायरमेंट 2022 में होनी थी लेकिन उन्होंने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) ले ली। जिसके बाद उनके राजनीति में प्रवेश के कयास लगाए जाने लगे। अब वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। माना जा रहा है कि अरविंद कुमार शर्मा को उत्तर प्रदेश में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है और दिल्ली से उन्हें एक ख़ास काम देकर भेजा गया है।

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