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कोविड प्रोटोकॉल की लड़ाई जातिवाद तक आई, डीएम शैलेश यादव के सस्पेंड होने पर कटा बवाल!

by Khabartakmedia

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला का एक वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो एक शादी समारोह की थी। पश्चिमी अगरतला में एक शादी हो रही थी। समय रात के 11 बजे के पार हो चुका था। तभी अचानक शादी समारोह में पुलिस पहुंच गई। साथ में पश्चिमी अगरतला के जिलाधिकारी शैलेश कुमार यादव भी आए थे। पुलिस बारात देखने नहीं आई थी। छापा मारने आई थी। क्योंकि कोविड के दिशा निर्देशों का उल्लंघन कर यह शादी समारोह चल रही।

वीडियो में आगे दिखता है जिलाधिकारी शैलेश कुमार यादव का सख्त रवैया। जिलाधिकारी ने शादी बीच में ही रुकवा दी। साथ ही शादी करा रहे पंडित को एक थप्पड़ भी जड़ दिया। जिलाधिकारी के गुस्से के शिकार एक और व्यक्ति भी हुए। अफरातफरी मच गई। लोग इधर उधर भागने लगे। जिलाधिकारी ने जहां ये शादी हो रही थी उस होटल को भी सीज कर दिया। पूरा वीडियो हर जगह शेयर किया गया। कई ने मजाकिया अंदाज में वीडियो बांटी, तो बहुतों ने गंभीरता से।

शुरू हुआ समर्थन और विरोध:

सोशल मीडिया तुरंत ही इस कार्रवाई पर दो हिस्सों में बंट गया। एक हिस्सा जिलाधिकारी शैलेश कुमार यादव के समर्थन में। दूसरा धड़ा उनके विरोध में। त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। बिप्लव कुमार देव यहां के मुख्यमंत्री हैं। भाजपा के कई विधायकों में जिलाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की। कहा गया कि “जिलाधिकारी ने एक पंडित के ऊपर हाथ उठाया और शादी भी रुकवाई।” उन पर आरोप लगा कि डीएम साहब ने अपने पद का रौब गांठकर लोगों को परेशान किया। तमाम विवादों के बीच शैलेश कुमार यादव ने अपने इस कृत्य के लिए माफी भी मांग ली।

माफी मांगने पर भी खत्म नहीं हुआ विवाद:

हालांकि जिलाधिकारी शैलेश कुमार यादव के माफी मांग लेने से यह विवाद थमा नहीं। उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। कोविड नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने वाले पश्चिमी अगरतला के जिलाधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन यह सब कुछ यहां भी नहीं रुका। मामले में तुरंत “जातिवादी दृष्टिकोण” की घुसपैठ हुई। अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा ने 28 अप्रैल को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा। अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा ने मांग की कि “जिलाधिकारी साहब ने कानून की आड़ में एक सम्मानित ब्राह्मण को थप्पड़ मारा। इसलिए उन्हें बर्खास्त किया जाए। साथ ही वहां पर मौजूद पंडित जी सहित अन्य लोगों से सार्वजनिक माफी मंगवाई जाए।

ट्विटर पर अब जिलाधिकारी शैलेश कुमार यादव के समर्थन में ट्वीट हो रहे हैं। उनके समर्थन में हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। तमाम नेता और पत्रकार भी इस मामले में ट्वीट कर रहे हैं। कुल मिलाकर मामला कानून के पालन से जातिगत बर्चस्व की लड़ाई तक पहुंच गया है। अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा ने इसे “सम्मानित ब्राह्मण” की भावना से जोड़ दिया। तो अब दूसरा गुट भी खुलकर सामने आ चुका है। जाति को लेकर बहस छिड़ी हुई है। जब भारत में महामारी का आतंक है। सार्वजनिक जुटान की मनाही है। शादी विवाह के कार्यक्रमों के लिए एक निश्चित नियमावली बनी हुई है। इसके उल्लंघन पर एक जिलाधिकारी द्वारा कार्रवाई की जाती है। लेकिन अब इसे एक नया जामा पहना दिया गया है।

देखते हैं कि कानून के पालन पर हुई कार्रवाई को लेकर शुरू हुई जातिवादी बर्चस्व की यह सड़ी हुई बहस कहां और कब खत्म होती है?

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