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कोविड की नई लहर और जीवित रहने का मौलिक अधिकार!

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कोविड-19 महामारी की एक साल के भीतर कितनी लहर आ चुकी है, इस पर कोई ठोस जानकारी नहीं है। बहुत से लोग इसे कोरोना की दूसरी लहर बता रहे हैं। जबकि कई लोग इसे तीसरी लहर कह रहे हैं। इसलिए मैंने इसे नई लहर लिखा है। इस नई लहर ने भारत में वो विपदा लाई है जिसकी उम्मीद सरकार और जनता दोनों को ही नहीं थी। या कहें कि सरकार ने जानबूझकर ये अंदाजा नहीं लगाया कि देश में एक बार फिर संक्रमण बढ़ सकता है। जबकि दुनिया भर में एक नजर दौड़ाने पर यह दिख जाता कि कई देशों में कोरोना का संक्रमण दोबारा आया है। इस बार आफत बड़ी है, खौफनाक है, हत्यारी है।

हर रोज 2-3 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो रहे हैं। दो हजार से अधिक लोग मर रहे हैं। (इस मरने को हम अंत में एक दूसरा नाम देंगे।) ये हाल तो सरकारी आंकड़ों का है। हक़ीक़त इसे ज्यादा खराब है। वास्तविक आंकड़े इससे ऊंचे पहाड़ हैं। संक्रमितों की सुनामी इतनी तेज है कि अस्पतालों में जगह नहीं है। दवाइयां नहीं मिल रही हैं। एक अदद दवाई के लिए हजारों रुपए झोंकने पड़ रहे हैं। देश के अलग अलग राज्यों में ऑक्सीजन की कमी से लोग मर रहे हैं। क्या कभी किसी ने कल्पना की थी कि इस दौर में लोग ऑक्सीजन की किल्लत से मरेंगे? लोग तड़प रहे हैं, गिड़गिड़ा रहे हैं।

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश के अस्पतालों तक में ऑक्सीजन ख़तम हो जा रही है। अस्पताल प्रशासन सीधे कह रहा है कि “हमने मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार से कई बार गुहार लगाई है लेकिन कोई भी ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं करा रहा है।” अस्पताल अपने दरवाजे पर नोटिस चस्पा कर रहे हैं कि “हमारे यहां ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हैं। गंभीर मरीजों को उनके परिजन कहीं और ले जाएं।” दिल्ली के नामचीन अस्पतालों में से एक MAX HOSPITAL जब अरविन्द केजरीवाल और नरेंद्र मोदी के नकारे और हत्यारी सरकार से हार गया तो दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंच गया। MAX ने अदालत से मिन्नत की कि आप ही ऑक्सीजन दिलाइए। दिल्ली उच्च न्यायालय ने तुरंत मामले की सुनवाई की और नरेंद्र मोदी सरकार को फटकार लगा दी। कोर्ट ने कहा कि “Beg, Borrow or Steal” लेकिन ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए।

PTI की एक खबर के मुताबिक आज ही (23-04-2021) को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में 25 मरीजों। की मौत ऑक्सीजन की कमी से हो गई है। ऐसे सैकड़ों लोग ऑक्सीजन ना मिल पाने के कारण देश भर में मर रहे हैं। तो क्या ये एक नागरिक के मूल अधिकारों का हनन नहीं है? भारत का संविधान अपने देश के नागरिकों को “जीवन का अधिकार” देता है। अनुच्छेद 21 के तहत “जीवन के अधिकार” को एक मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया गया है। इसकी जिम्मेवारी सरकार की है। यह सरकार का दायित्व है कि हर नागरिक को जीवन जीने का अधिकार मिले। लेकिन दवाइयों और ऑक्सीजन की कमी से हजारों लोग हर रोज अपनी जान गंवा रहे हैं। सरकार और सिस्टम लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। आपको ये बात समझ में आ रही है? लोग ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण तड़प कर मर रहे हैं। सांसों के लिए लोग मर रहे हैं। ये मौलिक अधिकारों के ऊपर सिस्टम का कटिला जूता चढ़ रहा है। भारत के नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारंटी देने वाला सर्वोच्च न्यायालय भी अब तक कुछ नहीं कर पा रहा है।

सरकार में बैठे नकारे नेताओं ने चुनावों ने कितने ख्वाब दिखाए थे जनता को! एक से एक सपने दिखाए गए थे। एक से एक सुविधाएं मुहैया कराने के वादे और दावे किए गए थे। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार से लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार, छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार, मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार, राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार और ऐसे ही तमाम राज्यों की सरकारें। इन सभी की स्थिति वही है। केंद्र सरकार के दो सबसे जिम्मेदार नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जब स्थिति बद से बदतर हो रही थी तब बंगाल में रैलियां कर रहे थे। लोगों की लाशों पर चलकर ये नेता लाशों की मंच पर बैठकर बंगाल को सोनार बांग्ला बनाने के ख्वाब दिखा रहे थे। लेकिन दूसरी ओर पूरा देश नेतृत्व की कमी से लाशों का ढेर बनता जा रहा था।

“हालात बिगड़ चुके हैं” ये कहना भी अब मजाक ही है। क्योंकि हालात बिगड़ने से ज्यादा आगे जा चुकी है। इस स्थिति को “बिगाड़ना” नहीं कह सकते। ये कुछ और ही है। भाषा के जानकारों को अब अलग शब्द गढ़ना चाहिए। खैर, एक बात लिखकर कहीं दीवारों पर साट दीजिए माने चिपका दीजिए। कोविड-19 की इस नई लहर में हो रही मौतें, मौत नहीं हैं। ये “गैर इरादतन की गई हत्या है।” और शायद इससे भी अधिक “हत्या की ओर धकेलना है।” आप जो भी कहें लेकिन इनकी प्रकृति “हत्या” के स्वभाव से मिलती मालूम होती है। हत्या, जो हमारे देश की मवाद बन चुकी व्यवस्था कर रही है, हमारे देश के अलग अलग सत्ता तंत्र पर काबिज निकम्मे और हत्यारे नेता कर रहे हैं।

आप अपना और अपनों का और उनकी सांसों का ख्याल रखें। कोरोना वायरस बेहद जानलेवा है। उससे भी अधिक जानलेवा हमारी और आपकी सरकारें हैं। बचिए और बचाईए। उम्मीद करेंगे कि जब कभी यह महामारी खत्म हो जाएगी तब बहुत कुछ बचा होगा।

(तस्वीर livemint.com website की है।)

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