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Home कोरोना वायरस लघु पत्रिका आन्दोलन के सशक्त हस्ताक्षर रमेश उपाध्याय का निधन

लघु पत्रिका आन्दोलन के सशक्त हस्ताक्षर रमेश उपाध्याय का निधन

by Khabartakmedia

प्रख्यात साहित्यकार और हिंदी गद्य के महान विभूति रमेश उपाध्याय का निधन हो गया। रमेश उपाध्याय कोरोना वायरस से संक्रमित थे। शनिवार की सुबह कोविड-19 से लड़ते हुए उन्होंने अपनी सांसे गंवा दी। रमेश उपाध्याय महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग और यूजीसी यूनिट से भी जुड़े थे। उनके निधन पर काशी विद्यापीठ में हिंदी विभाग की ओर से एक शोक सभा का आयोजन किया गया। ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रमेश उपाध्याय को श्रद्धांजलि दी गई। इस ऑनलाइन बैठक में विस्तार से प्रो.उपाध्याय के सर्जनात्मक अवदान और उनके निधन से उपजी रिक्तता का उल्लेख किया गया।

यूजीसी नोडल ऑफिसर प्रो. निरंजन सहाय ने कहा कि “हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार रमेश उपाध्याय कोविड से संक्रमित थे। शनिवार सुबह उनका देहावसान हो गया। उनके निधन से लघु पत्रिका आन्दोलन का एक सशक्त चेहरा अस्त हो गया। उनकी पत्रिका कथन और पुस्तिका श्रृंखला आज के सवाल ने हिन्दी के जन बौद्धिकों के बीच अपनी ख़ास जगह बनाई।1969 में प्रकाशित अपने पहले कहानी संग्रह जमी हुई झील के बाद उन्होंने लगातार रचनात्मक सक्रियता जारी रखी। उन्होंने पन्द्रह से अधिक कहानी संग्रह, पाँच उपन्यासों, तीन नाटकों और अंग्रेजी और गुजराती से अनेक पुस्तकों का हिन्दी अनुवाद भी किया।” हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. अनुराग कुमार ने बताया कि “प्रो.उपाध्याय ने रचनात्मक लेखन के अलावा साहित्य के सैद्धांतिक पक्ष पर विपुल लेखन किया। उनके निधन से हिन्दी संसार मर्माहत है।

विभाग के पूर्व आचार्य प्रो. सुरेन्द्र प्रताप, प्रो. शिवकुमार मिश्र, डॉ. राजमुनी, डॉ. रामाश्रय सिंह, डॉ. अनुकूल चंद राय, डॉ. विजय रंजन, डॉ. प्रीति एवं डॉ. सुरेन्द्र प्रताप ने भी उनके अवदानों की चर्चा की और हिन्दी संसार में उनके निधन से उपजी रिक्तता का उललेख किया।

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