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मीरजापुर: वोट न देने पर 7 साल के लिए हुक्का पानी बंद कर गांव से निकलने का फरमान!

by Khabartakmedia

मिर्जापुर जिले के चुनार थाना अंतर्गत खानपुर गांव के रहने वाले रमेश सिंह ने बीते महीने ग्राम पंचायत चुनाव में वोट क्या डाल दिया कि उनकी शामत ही आ गई।

दरअसल उन्होंने अपनी मर्जी से अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट डाल दिया था। इसकी खबर जब दूसरे उम्मीदवार(रोमा सिंह) के पति (रितेश सिंह उर्फ बच्ची) को लगी तो उन्होंने 29 अप्रैल को एक छोटी-सी आकस्मिक सभा बुलाई। जबकि 26 अप्रैल को मिर्जापुर में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न हुई थी।

यह मीटिंग रात में बुलाई गई जिसमें कथित तौर पर कुर्मी समाज के कुछ लोग शामिल हुए। सभा ने एक पत्र जारी करते हुए रमेश सिंह का सात साल तक हुक्का पानी बंद करने, गांव वालों से सभी रिश्ते खत्म करने और गांव से निष्कासित करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया। कहा गया कि कुर्मी समाज की आकस्मिक बैठक में रमेश सिंह को खानपुर ग्राम सभा से पूर्ण रूप से निष्कासित व हुक्का पानी बंद कर सभी संबंध 7 वर्ष के लिए खत्म करने का फैसला हुआ है। इस फैसले को वैध ठहराने के लिए कई लोगों के हस्ताक्षर भी कराए गए।

कोरोना प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां:

खानपुर गांव में कुर्मी समाज की हुई आकस्मिक बैठक में कोरोना के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई। पूरे प्रदेश में आचार संहिता लागू था। ऐसे में धारा-144 के बावजूद लोग पुलिस की आंख में धूल झोंक कर इतनी संख्या में इकट्ठा हुए। वो भी किसी का हुक्का पानी बंद करने के लिए।

फैसला सुनते ही होश उड़ गया:

जिस गांव में रमेश सिंह सालों से रहते आ रहे हैं, जिस गांव को अपना सब कुछ समझते हैं, उसी गांव में रात को अचानक यह फरमान आया कि हुक्का पानी बंद कर सभी संबंध खत्म कर दिये गयें हैं तो उन्हें सदमा सा लगा। एकबार तो यकीन ही नहीं हुआ। फिर थोड़ी देर में उनके वॉट्सएप्प पर वह पत्र भी आ गया। जिसमें कुर्मी समाज के तथाकथित लोगों ने उन्हें बहिष्कृत करने के लिए हस्ताक्षर किया था। रमेश सिंह बताते हैं कि इस फैसले से वो काफी तनाव में हैं। पूरा परिवार डर के साए में जी रहा है।

कौन है इस फरमान के पीछे:

इस तुगलकी फरमान की जड़ गांव की प्रधान रोमा सिंह का पति रितेश सिंह उर्फ बच्ची है। रमेश सिंह ने बताया कि रितेश की पत्नी को वोट न देने पर रितेश ने ही यह सभा बुलाई और मुझे गांव छोड़ने का फरमान जारी किया। उन्होंने कहा कि रितेश गांव का रसूखदार व दबंग आदमी है। इसलिए डरकर सब उसकी बात मजबूरी में मान लेते हैं। चुनाव के वक्त ही रितेश व रमेश के बीच मारपीट भी हुई थी। जिसकी तहरीर रमेश ने चुनार थाने में दी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

प्रधान रोमा सिंह का पति रितेश सिंह उर्फ बच्ची (काले घेरे में)

यह सब कुछ हुआ उसी मिर्जापुर जिले में जहां की सांसद अनुप्रिया पटेल हैं। यह करतूत भी तथाकथित कुर्मी(पटेल) समाज के लोगों का है। लोकतंत्र में वोट देना नागरिक का सबसे बड़ा अधिकार बताया गया है। लेकिन अपने मर्जी से वोट देना ही अगर किसी नागरिक को भारी पड़ जाए और उसे गांव छोड़ने का फरमान जारी कर दिया जाए तो ऐसे लोकतंत्र कि उस नागरिक को क्या जरूरत है?

सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे जाति आधारित समूह किसी को जबरन गांव से निकाल सकते हैं? अथवा उनका हुक्का पानी बंद कर सकते हैं? ध्यान देने वाली बात यह है कि उस समय तक पंचायत का गठन ही नहीं हुआ था। पंचायत का गठन बीते 27 मई 2021 को हुआ। तो यह सभा किस अधिकार से बुलाई गई?

दिलचस्प यह है कि खानपुर गांव में महिला प्रधान हैं। लेकिन अवैध रूप से सारा कार्यभार पति के कंधों पर है। कहीं ऐसा तो नहीं की महिला को घर से बाहर निकलने ही नहीं दिया जा रहा और महिला प्रधान के नाम पर पुरुष मनमाने ढंग से पंचायत का संचालन कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा गंभीर सवाल यह है कि प्रशासन ने एक महीना से भी अधिक हो जाने के बावजूद कोई सुध क्यों नहीं ली? रमेश सिंह ने बातचीत में बताया कि उन्हें डर है कि कहीं यह फैसला हिंसक रूप न ले ले! क्योंकि चुनाव के दौरान रमेश सिंह व रितेश के बीच मारपीट हो चुकी है। जिसकी रिपोर्ट उन्होंने संबंधित चुनार थाने में दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन ने यदि कोई ठोस कार्रवाई नहीं की तो यह मामला हिंसक भी हो सकता है।

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