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किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को पंजाब सरकार देगी सरकारी नौकरी!

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केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन पर पंजाब सरकार ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान किया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिवार के लिए एक जरूरी घोषणा की है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि किसान आंदोलन में जिन किसानों की मौत हो गई है उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। यह नौकरी पंजाब की राज्य सरकार अपनी ओर से देगी। नौकरी राज्य की ही होगी।
कैप्टन ने कहा कि “मुझे एक रिपोर्ट मिली है कि केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे किसान आंदोलन में 76 किसानों की मृत्यु हो गई है। आज हम घोषणा कर रहे हैं कि उन किसान परिवारों के किसी एक सदस्य को राज्य सरकार की नौकरी दी जाएगी।”

farmers protest (file photo)

गौरतलब है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कृषि संबंधी तीन कानून बनाए हैं। देश भर के किसान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। देशव्यापी किसान आंदोलन पिछले ढाई महीने से भी अधिक समय से चल रहा है। देश के अलग अलग राज्यों से किसान आकर दिल्ली की सीमा पर बैठे हैं। इस आंदोलन में मुख्य तौर पर पंजाब और हरियाणा के किसान शामिल हैं। किसान आंदोलन में अब तक 76 किसानों की मौत हो चुकी है। इनमें कई ऐसे किसान भी हैं जिन्होंने कृषि कानून के विरोध में खुदकुशी कर ली है।
किसानों की मांग है कि मोदी सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले और न्यूनतम समर्थन मूल्य की संवैधानिक गारंटी दे। भारत सरकार और किसान नेताओं के बीच अब तक दस दौर की बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन सकी है। बता दें कि केंद्र सरकार ने किसान नेताओं के सामने बीते दिन की वार्ता में एक नया प्रस्ताव रखा था। सरकार ने कहा था कि यदि किसान चाहें तो तीनों कृषि कानूनों को अगले डेढ़ साल तक के लिए लागू नहीं किया जाएगा। किसानों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। वे कानून की पूर्णतः वापसी की मांग पर अभी भी डटे हुए हैं। आज एक बार फिर दिल्ली के विज्ञान भवन में किसान नेताओं और भारत सरकार के बीच बैठक हुई। हालांकि हर बार की तरह आज भी बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका।
सरकार की कोशिश है कि किसान किसी भी तरह से 26 जनवरी के पहले यह आंदोलन समाप्त कर दें। क्योंकि किसानों ने पहले ही घोषणा कर दी है कि गणतंत्र दिवस के मौके पर वे भी ट्रैक्टर मार्च का आयोजन करेंगे। सरकार को लगता है कि किसानों का यह कदम मोदी सरकार के लिए अपमानजनक साबित होगी।

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