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Home ताजा खबर काशी विद्यापीठ: छात्रसंघ चुनाव के लिए छात्र नेता हुए अमर्यादित, बीएड छात्र पहुंचे कुलसचिव दफ्तर

काशी विद्यापीठ: छात्रसंघ चुनाव के लिए छात्र नेता हुए अमर्यादित, बीएड छात्र पहुंचे कुलसचिव दफ्तर

by Khabartakmedia

कोरोना संक्रमण के दौरान बंद पड़ा काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय एक बार फिर खुल चुका हैं। कक्षाएं भी चलने लगी हैं और साथ में धरने प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। विश्वविद्यालय खुलते ही कई मुसीबतें सामने आ चुकी हैं। फिलहाल जमीन पर विश्वविद्यालय प्रशासन दो तरह के छात्रों के विरोध का सामना कर रही है। एक छात्र गुट वो है जो छात्र संघ चुनाव के लिए बीत चौबीस घंटे से धरने पर बैठे हैं। विश्वविद्यालय के छात्र नेता गत शुक्रवार के दोपहर से ही पंत प्रशासनिक भवन के सामने बैठकर लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। इनकी मांग है कि कुलपति जल्द से जल्द चुनाव अधिकारी की घोषणा करें और छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर लिखित आश्वासन दें। धरने पर छात्र नेता लगातार एक नारे का इस्तेमाल कर रहे हैं जो मर्यादा लांघती हुई नजर आ रही है। “कुलपतिया की तीन दवाई, जूता, चप्पल और पिटाई “ जैसे नारे प्रो. टी. एन. सिंह (काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति) के लिए लगाए जा रहे हैं। प्रो. सिंह का नाम भारत और पूरे विश्व के बड़े वैज्ञानिकों में शुमार है। वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन भी क्रूर रवैया अपनाए हुए है। हाड़ कंपाती ठंड के मौसम में रात भर छात्र नेता पंत प्रशासनिक भवन के सामने बैठे रहे लेकिन उनकी खोज खबर लेने कोई आला अधिकारी नहीं आया। धरने के प्रति प्रशासन का व्यवहार इस ओर संकेत कर रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन धरने को गंभीरता से नहीं ले रहा है। आखिरी सूचना के मुताबिक विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. संतोष कुमार गुप्ता धरना कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे थे। एक छात्र नेता ने बताया कि कुलानुशासक ने मौखिक तौर पर चुनाव कराने की बात कही है। लेकिन लिखित आश्वासन नहीं दिया।

नारेबाजी करते छात्र नेता

क्या है दूसरा बखेड़ा?

खबर तक मीडिया से अपनी समस्या बताते बीएड के छात्र

काशी विद्यापीठ के शिक्षा संकाय में पढ़ने वाले बीएड तृतीय सेमेस्टर के छात्रों ने अपने हक में आवाज बुलंद की है। ये छात्र इस बात से परेशान हैं कि जब कोरोना काल में इन्हें प्रोमोट किया गया तो इनके नंबर ठीक से नहीं दिए गए। छात्रों का कहना है कि भेदभावपूर्ण और असमानता के साथ नंबर दिया गया है। दूसरी दिक्कत ये है कि कक्षाएं शुरू नहीं हो रही हैं। छात्रों को उम्मीद है कि सरकार 2021 के मई महीने तक शिक्षक भर्ती की परीक्षाएं आयोजित करा सकती है। ऐसे में लेट लतीफी के कारण इन्हें डिग्री मिलने में देरी हो गई तो भर्ती परीक्षा में ये छात्र नहीं बैठ सकेंगे। छात्रों ने अपनी बात को आवेदन पत्र के रूप में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य तक पहुंचा दिया है। लेकिन इनका कहना है कि वे सोमवार को बड़ी संख्या में आकर शिक्षा संकाय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे।
अब देखना होगा विश्वविद्यालय प्रशासन इन दोनों मुद्दों पर किस तरह से प्रतिक्रिया जताती है। या फिर कुलपति प्रो. टी. एन. सिंह अपने पिछली रणनीति पर ही कायम रहते हैं, माने कि “चुप्पी”

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