Latest News
Home विशेष पंडित राजन मिश्र: कबीर का फकीराना अंदाज़ और बनारसीपन का मस्तमौला मन

पंडित राजन मिश्र: कबीर का फकीराना अंदाज़ और बनारसीपन का मस्तमौला मन

by Khabartakmedia

खबर तक के लिए प्रो. निरंजन सहाय का लेख:

कबीर के फकीराने अंदाज़ और बनारसी मस्तमौलापन के मजबूत किरदार पद्म भूषण से सम्मानित पंडित राजन मिश्रा का रविवार शाम निधन हो गया। गौरतलब है कि पंडित राजन मिश्र गुरुवार 22 अप्रैल को कोविड संक्रमण की चपेट में आ गए थे। साथ ही उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा। लिहाजा उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी और उन्हें वेंटिलेटर की सख्त जरूरत थी। पर नियति के क्रूर दौर और हर तरफ नाकाम स्वास्थ्य सेवाओं के भयावह मंजर के आततायी दौर में दिल्ली के सेंट स्टीफन हॉस्पिटल में समय रहते वेंटिलेटर नहीं मिला। तो उन्हें दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती करवाया गया। लेकिन तबतक बहुत देर हो चुकी थी। वहाँ उन्हें वेंटिलेटर तो मिला लेकिन तब तक राजन मिश्र दुनिया को अलविदा कह गए थे।

हिन्दुस्तानी संगीत के बनारस घराने की शान पंडित राजन मिश्रा के लिए लोगों ने लगातार ट्विटर पर बेड और ऑक्सीजन की मदद माँगी। पंडित साजन मिश्रा कि गुहार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीव गुप्ता की कोशिश के बाद पंडित राजन मिश्रा को सेंट स्टीफंस अस्पताल में दाखिला मिल था गया। लेकिन यह देर जानलेवा साबित हुई।

पंडित राजन साजन मिश्रा की युगल जोड़ी टूट गयी। क्या संयोग है कि भारतीय संत परम्परा की अलख जगाने वाले जिन कबीर से बनारस की आबोहवा को एक फकीराना अंदाज़ मिला उन्हीं कबीर के दर में बसे कबीरचौरा से बनारस घराने की संगीत परम्परा का भी आगाज हुआ। कहते हैं बनारस घराने के संगीत में स्पष्ट उच्चारण, रागों की शुद्धता का पालन और सुरों से खेलने का मस्तमौला अंदाज़, चैती, पूरबी, ठुमरी का देशज रंग जैसी विशिष्टताएँ एक अलग सुर संसार का दीदार कराती है।

दूरदर्शन के राज्यसभा चैनल के शख्सियत कार्यक्रम में समीना ने पंडित राजन साजन मिश्र की आमद पर 04 मई 2012 में कहा था,`हर गोशां किसके आने पर नगमाशरां है आज,/ सुरताल है फ़ज़ा में हवा गुनगुनाती है,/ हर शख्स किसकी दीद की खातिर खड़ा है आज।’ कहना न होगा जब वे अपने प्रिय रागों, भजनों को गाते थे तो जैसे वक्त का पहिया थम सा जाता था। सुर, लय और ताल की त्रिवेणी में सुनने वाला सराबोर हो जाता था।

सुर और ताल से खयाल गायकी की आलापचारी, बंदिशों की पुरनूर आमद, मद्धिम और द्रुत लय की तानों की उठान, तराने की मिठास और सुरों का ऐसा वैभव जो सम पर आकर अहसास कराए कि चाँद और सूरज की युगल जोड़ी का जवाब नहीं। हिन्दी की मशहूर कथाकार मृणाल पाण्डेय ने पंडित राजन मिश्र के निधन पर लिखते हुए इस जोड़ी को राम लक्ष्मण की जोड़ी कहा। संगीत के कद्रदान बखूबी जानते हैं, जब युगल जोड़ी गाती थी तो राजन मिश्र छोटे साजन मिश्र को खेलने के लिए पूरा अवसर देते थे। जैसे बड़े भाई सम की डोर थामें हों और छोटे भाई सुर के आकाश में विचरण कर रहे हों।

बनारस घराने की सुर-संगीत परंपरा के अप्रतिम प्रतिनिधि और शास्त्रीय संगीत में खयाल गायिकी की मशाल प्रज्जवलित करने वाले पंडित राजन मिश्र ने चार सौ साल पुराने बनारस घराने की परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने आरंभिक शिक्षा अपने दादा पंडित बड़े रामजी मिश्रा और पंडित हनुमान मिश्र के कठोर अनुशासन और रियाज के तपस्वी दिनचर्या के माध्यम से हासिल की। 1951 में कबीरचौरा, बनारस में जन्में राजन मिश्र ने अपने भाई साजन मिश्र के साथ खयाल शैली में गायन से देश-विदेश के संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया। पद्म विभूषण, राष्ट्रीय तानसेन पुरस्कार, संस्कृत अवार्ड, गंधर्व सम्मान और अनगिनत संगीत पुरस्कारों से सम्मानित राजन मिश्र का गायन सिर्फ़ अपने समय में ही महत्त्वपूर्ण नहीं है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अमूल्य धरोहर है।

बनारस के संकटमोचन संगीत समारोह से संगीत के कद्रदानों के दिल को जीत लेने वाली इस युगल जोड़ी ने किशोरावस्था में 1978 श्रीलंका में अपना पहला विदेशी शो किया। फिर इनकी आवाज सरहदों के पार- जर्मनी, फ्रांस, स्वीटजरलैंड, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, जैसे कितने ही मुल्कों में पहुँची और बनारस घराने की गमक ने हिंदुस्तानियत के रंग को अपने अंदाज में सराबोर किया।

बनारसी पान और बनारस को दुनिया भर में जीने वाले अपनी ख़ास तबीयत के शौकीन पंडित राजन मिश्र दीवाली और होली में दिल्ली से बनारस ज़रूर आते थे। दिल्ली में बनारस ढूँढने वाले राजन मिश्र का सपना था एक संगीत केन्द्र बनारस के कबीरचौरा में बने। वे चाहते थे जीवन का उत्तरार्ध बनारस में बीते। पुश्तैनी मकान को नये सिरे से अपने रहवास का सपना देखने वाले पंडित राजन मिश्रा चले गए। और बनारस की यादों में हमेशा के लिए रह गया, कबीर का फकीराना अंदाज़ और बनारसीपन के मस्तमौले सुर की अप्रतिम याद।

प्रो. निरंजन सहाय समन्वयक राष्ट्रीय शिक्षा नीति, नोडल ऑफिसर यूजीसी, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय वाराणसी

Related Articles

1 comment

Avatar
शिवशंकर यादव युवा छात्र संघ आजमगढ़ April 27, 2021 - 1:16 am

जय हो

Reply

Leave a Comment