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पीएम के एमएसपी था एमएसपी है और एमएसपी रहेगा वाले बयान पर क्या बोले राकेश टिकैत?

by Khabartakmedia

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाषण दिया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कई मुद्दों पर बोला। लेकिन सबका ध्यान इस बात पर था कि कृषि कानून और किसान आंदोलन पर वो क्या कहते हैं। पीएम ने कृषि कानून के तकनीकी पक्षों पर कोई खास बात नहीं की। हालांकि उन्होंने एक हेडलाइन वाला बयान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर जरूर दिया।

पीएम ने कहा कि “एमएसपी था, एमएसपी है और एमएसपी रहेगा।” उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति भ्रम ना फैलाए। कृषि कानूनों को कृषि सुधार के लिए जरूरी बताया। नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी तब वे भी इस कानून के हिमायती थे। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की बात भी की। उन्होंने कहा कि पहले के समय मनमोहन सिंह ने इस कानून को जरूरी बताया है। लेकिन अब कुछ लोग यू टर्न ले रहे हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत (फाइल फोटो)

राज्यसभा में दिए गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एमएसपी वाले बयान पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने जवाब दिया है। टिकैत ने मीडिया से कहा है कि “हमने कब कहा कि एमएसपी समाप्त हो जाएगी? हम तो मांग कर रहे हैं कि एमएसपी की संवैधानिक गारंटी दी जाए।” राकेश टिकैत ने कहा कि “हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार एमएसपी की संवैधानिक गारंटी दे। ताकि एमएसपी का लाभ भारत के हर किसान को मिल सके।” टिकैत ने आगे कहा कि “अभी देश में एमएसपी को लेकर कोई कानून नहीं है। इसलिए किसानों को इसका लाभ नहीं मिलता है। किसानों को व्यवसाई ठग देते हैं।”

बता दें कि एक आंकड़े के मुताबिक पूरे देश के महज 6 फीसदी किसानों को ही एमएसपी का लाभ मिलता है। आंदोलन कर रहे किसानों की मांग है कि एमएसपी को लेकर कानून बनाया जाए। ताकि देश के हर किसान को उसके फसल के लिए उचित मूल्य मिल सके। एमएसपी पर कानून ना होने की वजह से व्यवसाई मनमर्जी कीमत पर किसानों से फसल खरीदते हैं। जिससे उनका लाभ होता है और किसानों को भयंकर घाटा सहना पड़ता है।

लेकिन राज्यसभा में बोलते हुए पीएम ने किसानों की मांग से अलग होकर बातें कही। नरेंद्र मोदी ने इस बात का कहीं जिक्र नहीं किया कि सरकार एमएसपी को लेकर कानून बनाएगी या नहीं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या प्रधानमंत्री जो बाते दावे के साथ राज्यसभा में कह रहे हैं उसे लिखित रूप में किसानों को नहीं दे सकते? क्या पीएम एमएसपी की पूरी बहस को दूसरे ही दिशा में लेकर चले गए हैं? क्योंकि किसान “एमएसपी की संवैधानिक गारंटी चाहते हैं” ना कि मौखिक बयान।

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