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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया जनरल थिमय्या म्यूजियम का उद्घाटन, पढ़िए जनरल थिमय्या की कहानी

by Khabartakmedia

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को जनरल थिमय्या म्यूजियम का लोकार्पण किया। कर्नाटक के जिला कोडागु के मडिकेरी में यह म्यूजियम बनाया गया है। यहां जनरल थिमय्या से जुड़े अनोखे तथ्य और उनके बहादुरी के किस्से देखने को मिलेंगे। राष्ट्रपति ने इस मौके पर ट्वीट कर खुशी जाहिर की है। उन्होंने इस संग्रहालय को युवाओं को प्रेरित करने वाला बताया है।

जनरल थिमय्या भारतीय सेना के इतिहास के सबसे बहादुर शख्सियतों में से एक हैं। आज भी उनके पराक्रम को लोग याद करते हैं। जनरल थिमय्या का पूरा नाम कोदेंडरा सुबय्या थिमय्या था। उनका जन्म 31 मार्च, 1906 को कर्नाटक के एक गांव में हुआ था। ब्रिटिश भारत के दौरान ही (1926 में) वे भारतीय सेना में शामिल हो गए थे। वे 19 वें हैदराबाद रेजिमेंट के हिस्सा भी रहे। जनरल थिमय्या द्वितीय विश्वयुद्ध में भी शामिल हुए थे

म्यूजियम का लोकार्पण करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

सन् 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो थिमय्या को मेजर-जनरल बना दिया गया। 1948 में कश्मीर घाटी में हुए पाकिस्तान के साथ भिडंत में वे मौजूद रहे। जनरल थिमय्या ने अंतरराष्ट्रीय निकायों में भी महत्वपूर्ण पदों का जिम्मा संभाला था। 7 मई, 1957 को उन्होंने भारतीय सेना से इस्तीफा दे दिया। इसी दिन वे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाए गए। तब भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। रक्षा मंत्री के पद पर नेहरू के करीबी वीके कृष्ण मेनन थे।

जब कृष्ण मेनन से नाराज़ थिमय्या ने इस्तीफा दिया:

वर्ष 1959 में भारत और चीन के बीच अनबन चल रही थी। इसी बीच जनरल थिमय्या और रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन के बीच एक सैन्य अधिकारी के प्रोमोशन को लेकर मनमुटाव हो गया था। कृष्ण मेनन से नाराज़ थिमय्या ने इस्तीफा देने का मन बना लिया। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा। लेकिन प्रधानमंत्री नेहरू ने इसे मंजूर नहीं किया। नेहरू की मान मनव्वल पर थिमय्या ने इस्तीफा वापस ले लिया। 7 मई, 1961 को सेवानिवृत्त यानी कि रिटायर हो गए।

जनरल थिमय्या को अपने शौर्य और बहादुरी के लिए वॉर मेडल, बर्मा स्टार, इंडियन इंडिपेंडेंस मेडल, जनरल सर्विस मेडल मिला। उन्हें आगे चलकर पद्म भूषण और डीएसओ (Distinguished Service Order) से नवाजा गया।

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