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चुनाव की तारीखों के ऐलान पर क्या बोले पीके, पश्चिम बंगाल में किसकी लड़ाई?

by Khabartakmedia

निर्वाचन आयोग ने गत शुक्रवार को इस साल के सबसे बड़े चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया। बंगाल में इस बार का विधानसभा चुनाव कुल आठ चरणों में कराया जाना है। 27 मार्च को पहले चरण का मतदान होगा। तो वहीं 29 अप्रैल को आखिरी चरण में वोट डाले जाएंगे। चुनाव का परिणाम आएगा 2 मई को। इसी दिन पता चलेगा कि बंगाल के सियासत में कौन शहंशाह बनेगा।

चुनावी तारीखों के ऐलान के बाद प्रशांत किशोर (पीके) ने ट्वीट किया है। प्रशांत किशोर ने अपने ट्वीट में लिखा है कि “One of the key battles FOR DEMOCRACY in India will be fought in West Bengal, and the people of Bengal are ready with their MESSAGE and determined to show the RIGHT CARD – #BanglaNijerMeyekeiChay
(Bengal Only Wants its Own Daughter) PS: On 2nd May, hold me to my last.” गौरतलब है कि प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के चुनावी रणनीतिकार की भूमिका में हैं। प्रशांत पिछले कई महीनों से बंगाल में ही हैं। यहां वो लागतार ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए योजनाएं बना रहे हैं। इसी वजह से बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर को सक्रिय नहीं देखा गया।

बंगाली बनाम बाहरी:

पश्चिम बंगाल के चुनाव में टीएमसी लगातार भीतरी बनाम बाहरी के नारे को आगे बढ़ा रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी रैलियों में आक्रामक तरीके से बंगाली और बाहरी का प्रचार कर रही हैं। उन्होंने अपने पिछले ही चुनावी सभा में कहा है कि “बंगाल पर गुजरात राज नहीं करेगा।” टीएमसी ने अब एक नया नारा भी जारी किया है। जो कि उनका मुख्य चुनावी नारा है। “बंगाल को चाहिए अपनी बेटी।” नारा बता रहा है कि टीएमसी इस चुनाव को बंगाली और गुजराती के बहस पर लाना चाहती है। क्योंकि इसका सीधा फायदा ममता बनर्जी को मिलेगा। नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को बाहरी आदमी के तौर पर पेश करने की कवायद चल रही है।

आठ चरणों के चुनाव पर उठ रहे हैं सवाल:

चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीख घोषित करते ही एक नई बहस शुरू हो गई है। दरअसल पश्चिम बंगाल के साथ साथ चार अन्य राज्यों में भी चुनाव होने हैं। जिसमें तमिलनाडु भी शामिल है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा के कुल सीटों की संख्या 294 है। जबकि तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटें हैं। चुनाव आयोग तमिलनाडु में मतदान एक चरण में (6 अप्रैल को) पूरा कराएगा। लेकिन पश्चिम बंगाल में मतदान आठ चरणों (27 मार्च से 29 अप्रैल तक) में कराए जाएंगे। इसी बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पूछा जा रहा है कि आखिर कौन सा गणित लगाकर यह तय किया गया है। आठ चरण के मतदान होने में लंबा वक्त लगेगा। निर्वाचन आयोग के फैसले पर अलग अलग बयानबाजी हो रही है। कई आरोप लग रहे हैं। हालांकि निर्वाचन आयोग ने बंगाल में आठ चरणों के मतदान को लेकर कोई कारण अब तक नहीं बताया है।

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