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क्यों हो रही रामदेव के गिरफ्तारी की मांग, क्या दवाई पर झूठा दावा नहीं है अपराध?

by Khabartakmedia

पतंजलि वाले बाबा रामदेव की गिरफ्तारी की मांग होने लगी है। ट्विटर पर मंगलवार की रात से ही #Arrest_Ramdev ट्रेंड हो रहा है। लगभग एक लाख लोगों ने इस पर ट्वीट किया है। लेकिन क्या वजह है कि अचानक रामदेव पर लोग भड़के हुए हैं? उन्हें जल्द से जल्द जेल भेजने की बड़ी मांग क्यों हो रही है?

पतंजलि ने पिछले दिनों नरेंद्र मोदी सरकार के दो मंत्रियों की मौजूदगी में एक दवाई का लोकार्पण किया। एक थे स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और दूसरे परिवहन मंत्री नितिन गडकरी थे। साथ में बाबा रामदेव और पतंजलि के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण भी थे। जिस दवाई की लॉन्चिंग हुई, उसका नाम है ‘कोरोनिल’। इस दवाई को लेकर रामदेव ने यह दावा किया कि “कोरोनिल को विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मान्यता मिल गई है।” रामदेव ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि “WHO की टीम पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट आई थी।” उन्होंने यह भी कहा कि “कोरोनिल को 150 से अधिक देशों में बेचने की अनुमति मिल चुकी है।”

मीडिया ने इस बात को खूब जोर शोर से प्रचारित किया। बहुत से न्यूज चैनलों ने रामदेव का इंटरव्यू चलाया और उनके किए दावों को लोगों तक पहुंचाया। इंडिया टीवी के संपादक रजत शर्मा ने भी एक ट्वीट किया। जिसमें कहा गया था कि “कोरोनिल को मिली WHO की अनुमति।” हालांकि बाद में इस दावे की पोल खुलने लगी। WHO के क्षेत्रीय इकाई ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए बताया कि “उनके पास कोई आयुर्वेदिक दवाई किसी अनुमति के लिए नहीं आई है।” इसके बाद रजत शर्मा ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

बड़ा सवाल:

बाबा रामदेव और मीडिया के बड़े हिस्से ने जिस तरह से एक फर्जी दावे का प्रचार प्रसार किया वो ख़तरनाक है। लाखों लोगों तक यह बात पहुंच गई कि कोरोनिल को WHO ने प्रमाणित कर दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या देश की जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों से इस स्तर पर खिलवाड़ किया जा सकता है? क्या यह एक संगीन अपराध नहीं है? रामदेव जैसे लोग सत्ता के करीबी होने के कारण क्या जनता की जिंदगी से खेल सकते हैं? इस मामले में क्या मोदी सरकार के दोनों मंत्री (डॉ. हर्षवर्धन और नितिन गडकरी) दोषी नहीं हैं? दोनों मंत्रियों ने बगैर जांच पड़ताल किए एक आपराधिक प्रवृत्ति के झूठ को क्यों बढ़ावा दिया? क्या दोनों मंत्रियों को इस ख़तरनाक दावे को लेकर सच्चाई सामने नहीं रखनी चाहिए थी? इसी बात पर गुस्साए लोग ट्विटर पर रामदेव की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। हालांकि ऐसा लगता नहीं है कि रामदेव पर कोई कार्रवाई होगी।

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