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दिशा रवि को मिल गई बेल, न्यायधीश की ये बातें पुलिस को याद रखनी चाहिए!

by Khabartakmedia

22 वर्षीय जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता दिशा रवि मंगलवार को जेल से रिहा हो गई हैं। दिशा रवि को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने बेल दिया है। उन्हें एक लाख रुपए के व्यक्तिगत मुचलके और दो अन्य जमानतदारों पर बेल मिली है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पुलिस जांच में दिशा रवि सहयोग करेंगी और न्यायालय की अनुमति के बगैर देश से बाहर नहीं जा सकेंगी। उनकी जमानत याचिका पर अतिरिकत सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा सुनवाई कर रहे थे।

दिशा रवि को दिल्ली पुलिस ने कर्नाटक से गिरफ्तार किया था। रवि कर्नाटक की ही रहने वाली हैं। पुलिस ने उन्हें 13 फरवरी को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। कोर्ट से बेल मिलने के कुछ घंटे बाद उन्हें जेल से छोड़ दिया गया। दिशा रवि पर आरोप है कि उन्होंने खालिस्तान समर्थक संगठन Poetic Justice Foundation (PJF) के साथ मिलकर 26 जनवरी के हिंसा की साज़िश की। उन्होंने एक “टूलकिट” बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया। जिसमें हिंसा फैलाने को लेकर योजना थी।

दिशा रवि (फोटो: hindustantimes.com)

अदालत ने क्या कहा?

हालांकि कोर्ट में दिल्ली पुलिस इस आरोप पर कोई सबूत नहीं पेश कर सकी। न्यायाधीश ने कहा कि “हमारे पूर्वजों ने विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को एक हिंसात्मक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दिया है। भारत के संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत असहमति का अधिकार दृढ़ता से सुनिश्चित है।”

दिल्ली पुलिस का कहना था कि दिशा रवि ने एक हानिकारक टूलकिट बनाया और उसे स्वीडिश जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को भेजा। बाद में ग्रेटा ने इसे ट्वीट भी किया। पुलिस के मुताबिक यह सब एक साज़िश के तहत हुआ। लेकिन आज की सुनवाई के दौरान जज धर्मेंद्र राणा ने इसे मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह कोई साज़िश नहीं लगती है। उन्होंने कहा कि “एक नागरिक के पास संचार करने के सर्वोत्तम साधनों का इस्तेमाल करने का मौलिक अधिकार है। जब तक कि वह संविधान के दायरे में हो। ऐसा वह विदेशी लोगों तक भी पहुंचने के लिए भी कर सकता है।”

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