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तारीख पर तारीख! किसानों को कोर्ट ले जाना चाहती है सरकार?

by Khabartakmedia

किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच आठवें दौर की बातचीत पूरी हो गई। इस बैठक ने भी वही हुआ जो लगभग पिछले हर बैठक में होता आ रहा है। माने आज की बातचीत भी रहा बेनतीजा। किसानों की मांग केंद्र सरकार ने नहीं मानी और किसान अपनी बात पर डटे रहे। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से आज न्यायालय की राग जरूर छेड़ी गई। बकौल किसान नेता सरकार ने किसानों को कोर्ट चलने के लिए कहा और तीनों कृषि कानूनों की वैद्यता को देखने की बात की। लेकिन किसान संगठनों ने इस प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया। किसानों का कहना है कि उनका मामला देश की चुनी हुई सरकार ही हल करेगी। किसान नेताओं ने कहा कि “हम यहीं लड़ेंगे, यहीं मरेंगे।”
किसान संगठनों और सरकार के बीच इस वार्ता के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस से कहा कि “आज की बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद एक बार फिर हम सब 15 जनवरी को इकट्ठा होंगे। तब तक हम भी और किसान भी आपस में चर्चा करेंगे।”

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

गौरतलब है कि एक के बाद एक आठ बार किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच वार्ता हो चुकी है। लेकिन जिन दो मांगों को लेकर किसान आंदोलन खड़ा हुआ है उसपर इंच भर भी सहमति नहीं बनी है।अब एक बार फिर सरकार ने 15 जनवरी की तारीख दे दी है। हालांकि आज जब यह बैठक बगैर किसी समाधान के खत्म हुई है तो इससे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के इरादे का अंदाजा लगाया जा सकता है। नरेंद्र मोदी सरकार बिल्कुल भी किसानों की बात मानने को तैयार नहीं लग रही है। गत गुरुवार को किसानों ने बड़े स्तर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रैक्टर मार्च निकाला थी जो की 26 जनवरी की एक रिहर्सल थी। किसानों के शक्ति प्रदर्शन के बावजूद केंद्र सरकार टस से मस नहीं हुई। दूसरी ओर किसान भी पूरे जज्बे के साथ टिके हुए हैं। किसानों का आंदोलन समय के साथ बड़ा और मजबूत होते जा रहा है। किसान आंदोलन को समर्थन देने वालों की तादाद बढ़ती ही जा रही है। ऐसा लगता है कि किसानों ने भी यह तय कर लिया है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती वे अपने घर नहीं लौटेंगे। किसान केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराना और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की संवैधानिक गारंटी चाहते हैं।

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