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“जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि” को चरितार्थ कर रहे हैं कविवर डॉ. कुमार विश्वास

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एक लोकोक्ति भारत में बेहद लोकप्रिय है। जिसका संबंध कवि समाज और उसकी कल्पनाओं एवं रचनाओं से है। कहा जाता है कि जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि। माने कि, जिस स्थान तक सूर्य की किरणें नहीं जा पाती हैं वहां एक कवि की कल्पना पहुंच जाती है। इस लोकोक्ति को अब नए सिरे से चरितार्थ कर रहे हैं दुनियाभर में हिंदी कविता को वर्तमान समय में ले जाने वाले कविवर डॉ. कुमार विश्वास।

भारत में कोविड-19 महामारी बेहद विकराल रूप धारण किए हुए है। कोरोना के संक्रमण से और लचर व्यवस्था के कारण हर रोज हजारों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। देश के अलग अलग हिस्सों में बसे लोग एक ही तरह से परेशान है। इस महामारी की आग में झुलस रहे हैं। कोरोना संक्रमण के शिकार हो जाने के बाद लोगों के सामने बड़ी समस्या है इलाज पाना। अस्पताल में जगह नहीं है, ऑक्सीजन नहीं है, वेंटिलेटर नहीं है, आईसीयू में जगह नहीं मिल रहा है। इसके अलावा जरूरी दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

चुनावों में चुनकर आए जनप्रतिनिधि कुछ खास राहत नहीं दे पा रहे हैं। ज्यादातर सांसद और विधायक नदारद ही हैं। जब लोगों ने देखा की सरकारी तंत्र चौपट हो चुका है। तब बहुत से लोग मदद को आगे आए। इन लोगों ने अपने स्तर पर एक नेटवर्क विकसित की है। जिसके सिरे देश के अलग शहरों में मौजूद हैं। एक अदृश्य नेटवर्क। जिसमें सैकड़ों लोग जरूरतमंदों की मदद में लगे हैं। इन्हीं में एक बड़ा नाम हैं डॉ. कुमार विश्वास।

ट्विटर बनी टूल:

डॉ. कुमार विश्वास ने जंग में अपना औजार बनाया है सोशल मीडिया और खासकर ट्विटर को। ट्विटर पर डॉ. कुमार को 80 लाख से ज्यादा लोग (8.5M) फॉलो करते हैं। उन्होंने इनका बखूबी उपयोग किया है इस महामारी से चल रही लड़ाई में। किसी भी शहर का कोई व्यक्ति मदद के लिए एक ट्वीट करता है। उस ट्वीट में डॉ. कुमार विश्वास को टैग करता है। ट्वीट डॉ. कुमार तक पहुंचती है। इसके बाद वो उसे संबंधित शहर के किसी पहचान के व्यक्ति को भेजते हैं। या फिर अपने कार्यालय को सौंपते हैं। या उस शहर के किसी बड़े नेता या मंत्री से मदद की अपील करते हैं।

इन कई विकल्पों में एक विकल्प और है। डॉ. कुमार या उनके कार्यालय के ट्विटर हैंडल से मदद के लिए ट्वीट की जाती है। ये ट्वीट हजारों लोगों तक पहुंचती है। इस तरह कुछ समय के भीतर कोई न कोई उपाय हो ही जाती है। उनका कार्यालय मरीज के परिजनों से संपर्क करता है और आवश्यक सहायता पहुंचाई जाती है। अस्पताल में भर्ती कराने से लेकर डाक्टर से परामर्श दिलाने तक हर जरूरी काम इनके द्वारा किया जाता है। डॉ. कुमार विश्वास और उनके कार्यालय के ट्विटर हैंडल की पिछले कुछ दिनों की टाइमलाइन ऐसे ही ट्वीट्स से अटी पड़ी है।

डॉ. कुमार विश्वास ने इस संकट के समय में अपनी लोकप्रियता और पहचान का इस्तेमाल लोगों की जान बचाने के लिए कर रहे हैं। जाहिर है अब उन्हें एक दिन में ऐसे हजारों आग्रह आते होंगे। किसी न किसी को कोई न कोई मदद चाहती होगी। लेकिन डॉ. कुमार विश्वास सबका साथ नहीं दे पाते होंगे। जो कि संभव भी नहीं है। इस बात का मलाल भी है डॉ. कुमार विश्वास को। इसके बावजूद विपरीत परिस्थिति में डॉ. कुमार विश्वास का उठ खड़ा होना और मजबूती से जरूरतमंदों का साथ देना सराहनीय है।

डॉ. कुमार विश्वास ने लोगों से अपील की है कि इस मुहिम से जुड़ें। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद की जा सके। अधिकतम लोगों की जान बचाई जा सके। किसी भी शहर के लोग उनके साथ जुड़ सकते हैं और इस खौफनाक महामारी के खिलाफ चल रही जंग में शामिल हो सकते हैं।

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