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कीर्तिमान: कश्मीरी लड़की बनी भारत की सबसे युवा महिला पायलट

by Khabartakmedia

जम्मू-कश्मीर महज एक विवादित राज्य तो नहीं है। सिर्फ सेना और उपद्रवियों से भरा एक भौगोलिक क्षेत्र तो नहीं है। सेना की बूट की थपथपाहट और आतंकियों की गोलियों के तड़तड़ाहट से सन्न हुए लोग भी रहते हैं यहां। यहां सांसे लेती हैं कुछ सपने। सपनों से भरा एक संसार। यहीं खुद को तराश रहे होते हैं कुछ युवा प्रतिभाएं। लेकिन इनकी चर्चा कम ही होती है। आखिर क्यों?

श्रीनगर की एक लड़की इन दिनों चर्चा में है। नाम है आयशा अज़ीज़। आयशा के सपनों को पंख लग गए हैं। वो भी सबसे कम उम्र में। आयशा सबसे कम उम्र की महिला पायलट बन गई हैं। उनकी आयु मात्र 25 साल की है। आयशा की उपलब्धि ने हर किसी की छाती चौड़ी कर दी है। लेकिन इनकी कहानी जिनके लिए रौशनी बन रही है वो हैं कश्मीरी युवा। कश्मीर की लड़कियां खासतौर पर इनसे प्रेरित होंगी।

2011 में भी आयशा अज़ीज़ ने एक कीर्तिमान स्थापित की थी। उस साल आयशा सबसे कम उम्र की स्टूडेंट पायलट बनी थीं। उन्होंने रूस के सोकोल एयरबेस से मिग-29 जेट उड़ाने की प्रशिक्षण हासिल की थी। तब वो अपने जीवन के 15 वें साल में थीं।

ANI से बातचीत के दौरान आयशा अज़ीज़

समाचार एजेंसी एएनआई से आयशा ने बातचीत की। उन्होंने कहा “मुझे लगता है कि पिछले कुछ सालों में कश्मीरी महिलाओं ने शिक्षा के क्षेत्र बेहतरीन प्रदर्शन किया है। घाटी के लोग बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं शिक्षा को लेकर।” आयशा ने बताया कि उन्हें यात्रा करना और हवाई उड़ान भरना बेहद जुनून भरा लगता है। अपने काम की गंभीरता को बताते हुए उन्होंने कहा कि “यह और कामों की तरह 9-5 वाला काम नहीं है। यहां कोई तय प्रतिरूप नहीं है। हमेशा अलग तरह की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होता है।”

आयशा के इस उपलब्धि पर हर किसी को गर्व हो रहा है। दरअसल आयशा जैसे लड़के लकड़ियों के बूते कश्मीर की धूमिल छवि साफ होनी है। ऐसे कारनामे जब कश्मीर की एक लड़की करती है तो वाकई बेमिसाल कहानी सामने उभर कर आती है। कश्मीर में ऐसे हजारों नौजवान हैं। लेकिन संसाधन की कमी और घाटी की विषम परिस्थिति इनकी उड़ान में बाधा बनती है। लेकिन इन तमाम कठिनाइयों से उबर कर उड़ जाए वो आयशा अज़ीज़ बन जाता है।

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