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पत्रकारिता के लिए करते थे खेती, सींघु बॉर्डर से गिरफ्तार मंदीप पुनिया की कहानी!

by Khabartakmedia

पत्रकारिता कभी मिशन हुआ करती थी। फिर उसे व्यवसाय बना दिया गया। ताकि हचक कर पैसा कमाया जा सके। लेकिन आज के दौर में पत्रकारिता जिन लोगों की बदौलत जिंदा है, उनके लिए ये एक मिशन ही है। टीवी के चमकाऊ चेहरे से दूर हजारों पत्रकार जमीन की धूल इसीलिए फांक रहे हैं। गत शनिवार की देर शाम दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे ही पत्रकार को हिरासत में ले लिया।

दिल्ली पुलिस ने सींघु बॉर्डर पर खबर करने गए मंदीप पुनिया और धर्मेंद्र सिंह नाम के दो पत्रकारों को पकड़ लिया। वे दोनों फिलहाल कहां हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं है। पुलिस कुछ भी बताने से इनकार कर रही है। बताया जा रहा है कि दोनों पर गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। वे सींघु बॉर्डर पर हुई हिंसा की रिपोर्टिंग कर रहे थे। ट्विटर पर इनकी रिहाई के लिए हैशटैग ट्रेंड कराए जा रहे हैं।

आईआईएमसी में भूख हड़ताल के दौरान की तस्वीर

रविवार को मंदीप की कहानी सबके सामने आई। मंदीप के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई किए एक व्यक्ति ने फेसबुक पर पोस्ट लिखी। जिसके बाद मंदीप की कहानी लोगों में छा गई है। वो आईआईएमसी के छात्र रहे हैं। यहीं से उन्होंने हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान वे आईआईएमसी प्रशासन के खिलाफ तीन दिनों तक भूख हड़ताल भी कर चुके हैं। जिसके बाद उनकी मांग मान ली गई थी। ये हड़ताल हॉस्टल के मुद्दे पर था।

मंदीप ने पढ़ाई पूरी करने के बाद कहीं स्थाई नौकरी नहीं ली। बतौर फ्रीलांसर काम करते रहे। लेकिन इससे उनका खर्च भी नहीं निकल पा रहा था। तो वे अपने गांव चले गए और खेती करने लगे। खेती किया ताकि उससे कुछ पैसे आ सकें। खेती के पैसों से मंदीप ने दूरदराज के इलाकों की रिपोर्टिंग की। इस दौरान उन्होंने कई बेहतरीन खबरें लिखी। मंदीप ने कारवां पत्रिका के लिए लगातार खबरें लिखी हैं।

मंदीप की कहानी लोगों को उनके हक में आवाज उठाने के लिए प्रेरित कर रही है। फेसबुक पर मंदीप पुनिया की कहानी लिखने वाले श्याम मीरा सिंह हैं। मंदीप पुनिया को लेकर सबकी चिंताएं बढ़ चुकी हैं। उन्होंने ही सींघु बॉर्डर पर हुए हिंसा में शामिल भाजपा कार्यकर्ताओं के नाम उजागर किए थे। जब ये लोग किसानों पर पत्थर फेंक रहे थे तब पुलिस खड़ी होकर मुंह ताक रही थी। इस पर भी सवाल मंदीप पुनिया ने ही उठाया था।

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