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पीएम मोदी के “मन की बात” पर झारखंड के सीएम की ये बात मोदी समर्थकों को कचोट जाएगी!

by Khabartakmedia

“आज आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने फोन किया। उन्होंने सिर्फ अपने मन की बात की। बेहतर होता यदि वो काम की बात करते और काम की बात सुनते।” ये बयान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिया है। हेमंत सोरेन ने यह बात ट्वीट कर कही है। उन्होंने यह ट्वीट गुरुवार की रात की है। जब यह ट्वीट हेमंत सोरेन ने की तब रात के 11 बज रहे थे। यही वजह रही कि उनकी इस बात बवाल कटा अगले दिन यानी शुक्रवार को। आज सुबह से ही झारखंड के मुख्यमंत्री की इस ट्वीट को लेकर राजनीति गलियारे में हलचल रही। नेता से लेकर पत्रकार तक ने इसकी व्याख्या की।

किसी ने कहा कि प्रधानमंत्री को केवल मीडिया मैनेजमेंट और हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए मुख्यमंत्रियों को फोन नहीं करना चाहिए। बल्कि सचमुच उनसे राज्य की स्थिति पर बातचीत करनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी को कोविड-19 महामारी के समय में सिर्फ अपनी बात दूसरों पर नहीं थोपनी चाहिए। बल्कि दूसरों के भी विचार सुनने चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी हेमंत सोरेन के बयान को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि “यह एक गंभीर चिंता का विषय है कि ऐसे नाजुक समय में भी प्रधानमंत्री सिर्फ बोलना चाहते हैं, सुनना नहीं।

हेमंत सोरेन पर लगा आरोप:

भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस बयान को राजनीति करार दिया। असम के भाजपा नेता और मुख्यमंत्री पद के दावेदार हेमंता विश्वा सरमा ने ट्वीट हेमंत सोरेन के ट्वीट को राज्य की जनता की पीड़ा का मजाक उड़ाना बता दिया। उन्होंने इसे ओछी हरकत और मुख्यमंत्री पद की गरिमा को गिराने वाला बताया।

हेमंत सोरेन की इस बयान पर लोगों ने समर्थन और आलोचना दोनों की। अपनी अपनी राजनीतिक सुविधाओं के अनुसार खूब टीका टिप्पणी हुई। गौरतलब है कि गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बातचीत की। जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों से उनके राज्य में कोविड की स्थिति पर बातचीत की। कोविड संक्रमण, उससे निपटने को लेकर तैयारियों पर पीएम ने बात की। लेकिन फोन पर वास्तव में क्या बात हुई ये सिर्फ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ही जानते हैं? हेमंत सोरेन ने पीएम मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने सिर्फ अपने “मन की बात” की। अगर वो काम की बात करते और सुनते तो बेहतर होता।

सवाल है कि क्या सचमुच प्रधानमंत्री ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को औपचारिकता पूरी करने के लिए फोन किया था? या फिर हेमंत सोरेन इसे जानबूझकर राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं? इन सवालों में जो भी सही हो, लेकिन ये दोनों ही संदेह घातक हैं। झारखंड में भी देश के बाकी राज्यों की तरह कोरोना संक्रमण बुरी तरह फैला हुआ है। ऐसे में राजनीति को कुछ महीनों के लिए किसी कोने में रखकर काम करने की जरूरत है। क्योंकि ऐसा नहीं करने का ही अंजाम भारत को भुगतना पड़ रहा है।

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