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Home कोरोना वायरस डाक्टरों की सबसे बड़ी संस्था IMA के सुझावों को केंद्र सरकार ने कूड़ेदान में फेंक दिया, हालात सामने हैं!

डाक्टरों की सबसे बड़ी संस्था IMA के सुझावों को केंद्र सरकार ने कूड़ेदान में फेंक दिया, हालात सामने हैं!

by Khabartakmedia

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की है। IMA भारत में डाक्टरों की सबसे बड़ी संस्था है। कोरोना महामारी से निपटने की नीतियों पर IMA ने स्वास्थ्य मंत्रालय को जमकर सुनाया है। उसने एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। जो कि बीते शनिवार यानी कि 8 मई को जारी किया गया था। इसमें तालाबंदी से लेकर टीकाकरण तक की योजनाओं की आलोचना की गई है। IMA ने कहा है कि उसने जो सलाह केंद्र सरकार को दिए थे, उसे कूड़ेदान में फेंक दिया गया।

IMA कोविड-19 से निपटने में स्वास्थ्य मंत्रालय की चरम सुस्ती और अनुचित कार्यों को देखकर हैरान है। उसने कहा है कि हमारी ओर से केंद्र सरकार को कई सलाह दिए गए थे लेकिन उसे सरकार ने कूड़ेदान में फेंक दिया। कोविड-19 महामारी की लड़ाई में IMA के विशेषज्ञों ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को कई सुझाव दिए थे। लेकिन सरकार ने उस पर ध्यान नहीं दिया। सरकार ने स्वास्थ्य जगत के पेशेवरों की बात को अनसुना किया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन

IMA के सुझाव कूड़ेदान में:

डाक्टरों की सबसे बड़ी संस्था की मानें तो सरकार ने अपने ज्यादातर फैसलों में जमीनी हकीकत को नजरंदाज किया है। IMA का कहना है कि केंद्र सरकार कोरोना की जमीनी हकीकत को समझे बगैर ही सारे फैसले कर रही है। इस संस्था ने यह सुझाव दिया था कि देशभर में एक बार फिर तालाबंदी कर देनी चाहिए। ताकि पूरे देश में कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ी जा सके। उनके अनुसार भारत में संक्रमण की चेन तोड़ने का यही विकल्प है। IMA का मानना है कि जीवन बचेगा तो अर्थव्यवस्था संभाल लिया जाएगा। इस संस्था ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को इस बाबत पत्र भी लिखा है। लेकिन सरकार ने इस सलाह को सिरे से खारिज कर दिया है।

भारत के लगभग सभी राज्यों ने अपने हिसाब से तालाबंदी कर रखी है। लेकिन सभी राज्यों में नियम अलग-अलग हैं। तालाबंदी का रूप अलग-अलग है। जिसके कारण छीछालेदर की स्थिति बन चुकी है। इसका कोई फायदा देखने को नहीं मिल रहा है। IMA के अनुसार पूरे देश में जागरूकता फैला कर योजना बनाकर लॉक डाउन करने की जरूरत है। इससे दो बड़े फायदे होंगे। पहला, देशभर में कोरोना संक्रमण की चेन टूटेगी। दूसरा, देश में स्वास्थ्य सुविधाओं को पुख्ता किया जा सकेगा। यह संस्था कहती है कि तालाबंदी ना करने का नतीजा है कि हर रोज 4 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो रहे हैं। साथ ही प्रतिदिन 4 हजार से ज्यादा लोग जान गंवा रहे हैं।

टीकाकरण पर भी खुली पोल:

भारत में कोरोना से निपटने के लिए लोगों को टीका लगाई जा रही है। सरकार ने टीकाकरण कार्यक्रम को चरणवार रूप से आगे बढ़ाया है। सबसे पहले अग्रिम पंक्ति के कोरोना योद्धाओं को वैक्सीन लगाई गई। फिर 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगनी शुरू हुई। 1 मई के बाद से 18 साल से ऊपर के लोगों का टीकाकरण हो रहा है। IMA ने टीकाकरण पर भी स्वास्थ्य मंत्रालय की आलोचना की है।

IMA ने कहा है कि “6 अप्रैल से वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर 18 साल से अधिक के लोगों को टीका लगाने की बात कही गई थी। लेकिन इसे 1 मई के बाद शुरू किया गया। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वास्थ्य मंत्रालय टीकाकरण का रोड मैप बनाने में असफल रहा। स्वास्थ्य मंत्रालय वैक्सीन का भंडारण भी नहीं कर सका।” डाक्टरों की इस संस्था ने सवाल किया है कि जब प्रधानमंत्री की अधिसूचना को ही लागू नहीं किया गया तो दोषी किसे कहा जाए?

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