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सत्ता की क्रूरता के भेंट चढ़ गए मानवाधिकार कार्यकर्ता स्टैन स्वामी, मृत्यु या हत्या?

by
Stan Swamy

जानेमाने मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी (Father Stan Swamy) की सोमवार को निधन हो गई। भीमा-कोरेगांव मामले में एक साल से जेल में बंद स्टैन स्वामी की आज दोपहर Holy Family Hospital में मृत्यु हो गई।। जेल में स्टैन स्वामी की तबियत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी। बीते शनिवार से उन्हें। वेंटिलेटर पर रखा गया था। लेकिन वो नहीं बच सके।

स्टैन स्वामी पिछले एक साल से मुंबई के नजदीक तलोजा जेल में बंद थे। उन पर Unlawful Activities Prevention Act (UAPA) की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। जेल में स्टैन स्वामी और उनके परिवार वाले लगातार खराब स्वास्थ व्यवस्थाओं को लेकर शिकायत कर रहे थे।

स्टैन स्वामी 84 साल के बुजुर्ग थे। उन्होंने अपनी आधी जिंदगी झारखंड के आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ने में गुजार दिया। 84 वर्ष के होने के बावजूद स्टैन स्वामी आदिवासियों के अधिकारों के लिए सड़क पर लड़ाई लड़ रहे थे। उनकी छवि एक बड़े मानवाधिकार कार्यकर्ता और लोकतांत्रिक व्यक्ति के रूप में थी।

इलाज की कमी:

84 साल की उम्र में तबियत खराब होना लाजमी है। स्टैन स्वामी का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। उन्होंने कई बार अदालत में अपने इलाज और जरूरी सुविधाओं के लिए अर्जी लगाई। तलोजा जेल में जूस पीने तक के लिए उन्हें अदालत से अनुमति लेनी पड़ी।

स्टैन स्वामी को पार्किनसन था। उनके हाथ कांपते रहते थे। इसलिए उन्होंने अदालत में गुहार लगाई कि उन्हें पानी पीने के लिए स्ट्रॉ उपलब्ध कराया जाए। सिर्फ स्ट्रॉ उपलब्ध कराने के लिए अदालत ने 20 दिन का समय ले लिया था। 20 दिन बाद उन्हें जेल में स्ट्रॉ देने की अनुमति मिली थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीते 28 मई को स्टैन स्वामी को अस्पताल में भर्ती कराने के आदेश दिए थे। जिसके बाद उन्हें Holy Family Hospital में भर्ती कराया गया। पिछले हफ्ते उनकी हालत और भी खराब होने लगी। तब उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।

खबरों के मुताबिक आज सुबह 4:30 बजे उन्हें हृदयाघात हुआ था। जिससे उन्हें बचाया नहीं जा सका।

श्रद्धांजलियों का सिलसिला:

भले ही स्टैन स्वामी सत्ता के लिए खतरा साबित कर दिए गए हों। उन पर UAPA जैसी गंभीर धाराएं लगा दी गई हों। लेकिन वो एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। जिन्होंने अपने जीवन के पचास साल आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई में लगा दिए। स्टैन स्वामी के निधन ने लोकतांत्रिक मूल्यों में भरोसा रखने वाले लोगों को तोड़ दिया है।

ट्विटर पर उन्हें याद करने वालों का तांता लगा है। कई लोग इस मृत्यु को “State Sponsered Murder” भी कह रहे हैं।

राहुल गांधी ने उनकी मृत्यु पर दुख जताते हुए ट्वीट किया। राहुल गांधी ने लिखा कि:

वकील प्रशांत भूषण ने भी ट्वीट करते हुए लिखा कि:

इतिहास लेखक रामचंद्र गुहा ने स्टैन स्वामी की मृत्यु के लिए गृह मंत्रालय और अदालत दोनों को दोषी ठहराया है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी स्टैन स्वामी की मृत्यु पर दुख जताया है।

भीमा-कोरेगांव मामले में जेल:

स्टैन स्वामी और उनके साथ कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को भीमा-कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किया गया था। 31 दिसंबर, 2017 को पुणे के नजदीक भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा को लेकर एनआईए की टीम जांच कर रही थी। उस हिंसा के दौरान एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी।

जांच में दावा किया गया कि ये कार्यकर्ता हिंसा के मौके पर मौजूद थे। साथ ही यह भी आरोप लगा कि एल्गर परिषद की बैठक में दिए गए हिंसक और भड़काऊ भाषण के चलते हिंसा हुई। इसी मामले में इन सामाजिक कार्यकर्ताओं पर UAPA की खतरनाक धारा लगाई गई थी। जिसमें स्टैन स्वामी का नाम भी शामिल था। उन्हें NIA की एक टीम ने झारखंड से गिरफ्तार किया था।

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