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बदायूं कांड के बाद लोग बॉयकॉट नेटफ्लिक्स को क्यों याद करने लगे?

by Khabartakmedia

उत्तर प्रदेश का जिला बदायूं आज लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। बदायूं के उघैती गांव में एक ऐसी घटना हुई है जिसने सभी को चौंका दिया है। उघैती के एक मंदिर में पचास साल की एक औरत पूजा करने गई हुई थी। मंदिर के पुजारी ने तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर महिला का बलात्कार किया और फिर हत्या कर दी। महिला के साथ दरिंदों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी है।
चौंकाने वाली बात है कि यह घटना रविवार की शाम की है। महिला के बेटे के मुताबिक रविवार को शाम पांच बजे के करीब महिला मंदिर गई थीं। लेकिन फिर वो जिंदा नहीं लौटी। आरोप है कि पुजारी ने अपने तीन साथियों के साथ मिलाकर इस घटना को अंजाम दिया और फिर रात 11 बजे के करीब महिला के शव को एक गाड़ी से घर के बाहर फेंक गए। मंदिर के पुजारी ने एक वीडियो में कहा है कि महिला मंदिर के पास मौजूद एक कुंए में गिर गई जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने क्या किया?

स्थानीय पत्रकारों की माने तो पुलिस ने शुरुआत में इस घटना पर पर्दा डालना चाहा। पुलिस को अंदेशा था कि बात बाहर आई तो प्रशासन की फजीहत होगी और सवाल उठेंगे। लेकिन इस झकझोर देने वाली घटना की भनक क्षेत्रीय पत्रकारों को लग गई और फिर सारी कहानी सामने आ गई। अब तक पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि मुख्य आरोपी यानी कि मंदिर का पुजारी पुलिस की पकड़ से बाहर है। मामले की जांच के लिए एक एसटीएफ का घटन किया गया है और स्थानीय थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है।

नेटफ्लिक्स बीच में कहां से आया?

बदायूं की घटना महज एक प्रशासनिक विफलता के मुद्दे पर चर्चा नहीं छेड़े हुई है। बदायूं की झकझोरने वाली कांड का आरोपी एक मंदिर का पुजारी है। कुछ दिन पहले नेटफ्लिक्स पर एक सीरीज आई थी जिसमें एक मंदिर में किसिंग सीन दिखाया गया था। इस सीन के कारण उस वेब सीरीज और नेटफ्लिक्स का खूब विरोध हुआ था। ट्विटर पर बॉयकॉट नेटफ्लिक्स का हैशटैग खूब चलाया गया था। बहुत से हिंदूवादी संगठनों ने खूब हंगामा मचाया था। अब जब ऐसी घटना एक मंदिर में घटी है और आरोपी उस मंदिर का पुजारी है। तो लोग सवाल कर रहे हैं कि एक फिल्म के सीन पर बखेड़ा बनाने वाले हिंदूवादी संगठन अब ऐसी दर्दनाक हकीकत पर मुंह क्यों बंद किए हुए हैं?
इन सारी दुनियावी बातों से इतर बदायूं की घटना भारतीय समाज की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह सिर्फ उत्तर प्रदेश में मनचलों की छूट और प्रशासन के नकारेपन का सबूत नहीं है बल्कि समाजिक क्षरण की भी दास्तां है।

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