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लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनके प्रधानमंत्री बनने की कहानी, किसान आंदोलन पर क्या कहते शास्त्री?

by Khabartakmedia

पंडित नेहरू के निधन के बाद देश और दुनिया में एक सवाल गूंजने लगा कि अब कौन? (हालांकि इस सवाल पर बहुत पहले से चर्चा शुरू हो चुकी थी कि नेहरू का उत्तराधिकारी कौन होगा।) उस समय के. कामराज कांग्रेस के अध्यक्ष हुआ करते थे। अगला प्रधानमंत्री किसे बनाया जाए इस गुत्थी को सुलझाने का दारोमदार के. कामराज ने अपने कंधे पर उठाया। कामराज देश भर के कांग्रेसी सांसदों, विधायकों, नेताओं से मिले। कुछ दूसरे दलों के नेताओं से भी कामराज ने मुलाकात की। प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में कई कांग्रेसी दिग्गज नेता सामने आए। प्रधानमंत्री की गद्दी को गरमाने की सालों से ख्वाहिश रखने वाले मोरारजी देसाई ने पूरी ताकत से अपनी दावेदारी पेश की। कुछ चतुर कांग्रेसियों ने इंदिरा गांधी का नाम भी इस फेहरिस्त में शामिल कर दिया था। इंदिरा गांधी उस समय काफी युवा थीं और उन्हें ख़ास सार्वजनिक या प्रशासनिक अनुभव भी हासिल नहीं था।

लेकिन उनके पास जो सबसे बड़ी ताकत थी वो ये कि इंदिरा गांधी पंडित जवाहरलाल नेहरू की बेटी हैं। कामराज जिन नामों पर कांग्रेसियों की राय बटोर रहे थे उसमें उत्तर प्रदेश के एक सहज और सरल स्वभाव वाले लाल बहादुर शास्त्री का नाम भी शुमार था। शास्त्री पंडित नेहरू के साथ काम भी कर चुके थे और नेहरू उन्हें पसंद भी करते थे। लालबहादुर शास्त्री एक मजबूत प्रशासक थे और हिन्दी पट्टी से आते थे। नेहरू और शास्त्री के बीच का संबंध भी शास्त्री के लिए सहायक साबित होने लगी थी। जबकि मोरारजी देसाई पर सबकी सहमति नहीं बन पा रही थी। देसाई के काम करने का आक्रामक रवैया उनके लिए कांटा साबित हुआ। सहमति शास्त्री के नाम पर बनी और के. कामराज ने लाल बहादुर शास्त्री का नाम आगे कर दिया। मोरारजी देसाई से दावेदारी वापस लेने की बात कह दी गई। कांग्रेस कार्यसमिति ने लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर ठप्पा लगा दिया और शास्त्री ने प्रधानमंत्री पद की शपथ 1 जून, 1965 को ले ली।

लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु उनके प्रधानमंत्री बनने के महज दो सालों के भीतर ही हो गई। सोमवार (11 जनवरी) को लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि है। “जय जवान जय किसान” का नारा देने वाले शास्त्री अपने कार्यों के लिए भारत में हमेशा याद किए जाएंगे। एक सवाल के साथ आप पाठकों हम छोड़ जाते हैं कि आज जब किसान सड़कों पर हैं और आंदोलन कर रहे हैं, कुर्बानियां दे रहे हैं तब लाल बहादुर शास्त्री जिंदा होते तो क्या कहते? क्या करते?

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1 comment

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Ayushi tiwari January 11, 2021 - 5:20 am

शास्त्री जी की स्वाभाविक सहानुभूति उन अभावग्रस्त लोगों के साथ रही जिन्हें जीवनयापन के लिए सतत संघर्ष करना पड़ता है। वे सदैव इस हेतु प्रयासरत रहे कि देश में कोई भूखा, नंगा और अशिक्षित न रहे तथा सबको विकास के समान साधन मिलें। शास्त्रीजी का विचार था कि देश की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता तथा सुख-समृद्धि केवल सैनिकों व शस्त्रों पर ही आधारित नहीं बल्कि कृषक और श्रमिकों पर भी आधारित है। इसीलिए उन्होंने नारा दिया, ‘जय जवान, जय किसान।…..अगर आज गाँधी, शास्त्री जैसे लोग होते तो नजारे कुछ और होते ।

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