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असम: हेमंत बिस्वा के आगे नहीं चली आरएसएस की जिद, आज लेंगे सीएम की शपथ!

by Khabartakmedia

10 मई यानी आज असम में हेमंत बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। आज दोपहर 12 बजे असम में शपथ ग्रहण समारोह होगा। शपथ ग्रहण में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल होंगे। 9 मई यानी बीते कल केंद्रीय कृषि मंत्री और भाजपा महासचिव अरुण सिंह की मौजूदगी में विधायकों की बैठक हुई थी। इस दौरान सर्वसम्मति से हेमंत बिस्वा को विधायक दल का नेता चुना गया। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कल ही इसका ऐलान भी कर दिया था।

गौरतलब है कि हाल ही ने असम में विधानसभा के चुनाव हुए थे। 2 मई को मतगणना हुई थी। जिसमें भाजपा ने अकेले 60 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा दो अन्य दलों के साथ गठबंधन में थी। भाजपा गठबंधन ने मिलकर कुल 75 सीटें जीती। जिसके बाद असम में भाजपा की सरकार बननी तय हो गई। बता दें कि असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को कम से कम 64 सीटें जरूरी हैं।

खूब हुई माथापच्ची:

हेमंत बिस्वा सरमा के नाम पर मुहर लगने से पहले भाजपा में खूब विचार विमर्श हुआ। लगभग एक हफ्ते तक सीएम के नाम को लेकर बातचीत चलती रही। भाजपा में असम के मुख्यमंत्री पद के लिए दो दावेदार थे। पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनवाल और भाजपा सरकार में मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा। राजनीतिक पंडितों की मानें तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघसर्बानंद सोनवाल का नाम आगे कर रही थी। लेकिन संख्या बल हेमंत बिस्वा सरमा के साथ थी।

असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनवाल

किसी भी राज्य में भाजपा के चुनाव जीतने पर मुख्यमंत्री के नाम के निर्धारण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका हर कोई जानता है। भले ही यह भूमिका औपचारिक तौर पर ना दिखती हो। असम में यही पेंच फंस रहा था। राजनीति टिप्पणीकारों के मुताबिक आरएसएस को हेमंत बिस्वा खासे भा नहीं रहे थे। इसकी वजह काफी हद तक उनकी पृष्ठभूमि है। हेमंत बिस्वा कांग्रेस के नेता रह चुके हैं। उनका आरएसएस से कोई लेना देना नहीं है। जबकि सर्बानंद सोनवाल आरएसएस के भरोसेमंद हैं।

हेमंत बिस्वा सरमा की घुड़की:

इन तमाम बहसों के बीच सूत्रों के हवाले से एक खबर आई। जब सर्बानंद सोनवाल को लेकर हवा तेज हुई। तब भाजपा आलाकमान की ओर से हेमंत बिस्वा सरमा को फोन गया। असम पर नजर गड़ाए कुछ पत्रकारों ने कहा कि इस फोन पर हेमंत बिस्वा ने कुछ ऐसा कह दिया कि सारी हवा बदल गई। “मेरे साथ 50 विधायकों का समर्थन है। मैं कांग्रेस का पुराना नेता हूं। मुझे वापस वहां जाने में कोई समस्या भी नहीं होगी।” बताया गया कि हेमंत बिस्वा ने फोन पर यही जवाब दिया था। खबरों के मुताबिक इतना भर कहकर हेमंत बिस्वा ने फोन काट दिया। फोन स्विच ऑफ भी कर दिया। इसके बाद उनके नाम के ऐलान की महज औपचारिकता ही बची थी। जिसे विधायक दल की बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पूरी कर दी।

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