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हिन्दी पत्रकारिता के मनीषी डॉ. अर्जुन तिवारी का निधन

by Khabartakmedia

हिन्दी पत्रकारिता की दुनिया के एक बड़े नाम रहे डॉ. अर्जुन तिवारी का निधन हो गया। उनके निधन से हिंदी पत्रकारिता को एक भारी क्षति हुई है। डॉ. अर्जुन तिवारी महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष भी रहे थे। आज उनके निधन की खबर से हर कोई मर्माहत महसूस कर रहा है। पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष रहे प्रो. अनिल कुमार उपाध्याय ने डॉ. अर्जुन तिवारी के निधन पर शोक प्रकट किया। प्रो. उपाध्याय ने अपनी यादें साझा करते हुए कहा कि ” आपने हम सबको छोड़ दिया।अभी कुछ हफ्ते पहले ही उनकी पत्नी का बिमारी के कारण निधन हो गया था। तब तिवारी जी ने दुःखी मन से मुझसे कहा कि अब मैं लिखना छोड़ दुंगा।पत्नी की त्रयोदश संस्कार के बाद भी फोन से सब ठीक से होने पर संतोष प्रकट किया। पर इतनी जल्दी एक सप्ताह में वे भी चले जाएंगे, कोई सोच भी नहीं सकता था।

एक पुराने कार्यक्रम में प्रो. अनिल कुमार उपाध्याय और डॉ. अर्जुन तिवारी

आगे प्रो. उपाध्याय ने बताया कि डॉक्टर अर्जुन तिवारी 1996 से लेकर 2001 तक पत्रकारिता विभाग, काशी विद्यापीठ से जुडे़ रहे। उन्होंने कहा कि  “मेरे विभागाध्यक्ष रहते वे प्रायः सभी कार्यक्रमों में आते थे। डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने बताया कि “डॉक्टर अर्जुन तिवारी जी ने दो दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन किया। भोजपुरी के क्षेत्र में भी डा. तिवारी ने बहुत कार्य किया। भोजपुरी- अंग्रेजी- हिन्दी शब्द कोश भी तैयार किया। डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने आगे कहा कि “डॉ. तिवारी जी का हिन्दी पत्रकारिता लेखन काफी बड़े फलक तक विस्तृत है। वास्तव में डॉक्टर अर्जुन तिवारी जी हिंदी  पत्रकारिता के ऋषि थे।”

शोक प्रकट करने वालो में प्रमुख रुप से डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. रूद्रानंद, डॉ. सुमित पान्डेय आदि ने अपने यादों को साझा कर श्रद्धांजलि अर्पित किया।

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