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वाराणसी: आंकड़ों की भुलभुलैया, वाराणसी में मौत के आंकड़ों पर जिला प्रशासन और राज्य सरकार में अंतर?

by Khabartakmedia

उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार राज्य में कोरोना का संक्रमण कम हो रहा है। वाराणसी में भी कोरोना महामारी का असर कम होता दिखाया जा रहा है। हर रोज कोविड के नए मामलों की संख्या हजार से नीचे उतर चुकी है। हर दिन मरने वाले लोगों की संख्या कम होने लगी है। लेकिन जमीनी मीडिया रपटें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। कोरोना महामारी के शुरुआती दौर से सरकार ने आंकड़ों की भुलभुलैया बनाई है। जिसमें न जाने कितने लोग गायब हो गए। इस भुलभुलैया ने न जाने कितने लोगों को निगल लिया है।

शुक्रवार की शाम कोरोना की बुलेटिन जारी हुई। लगभग एक ही समय पर उत्तर प्रदेश सरकार ने जिलेवार ढंग से पूरे प्रदेश की रिपोर्ट बताई। तो वहीं वाराणसी जिला प्रशासन की ओर से भी एक रिपोर्ट जारी हुई। वाराणसी में कोरोना संक्रमण को लेकर दोनों सरकारी आंकड़ें अलग अलग हैं। राज्य सरकार और वाराणसी जिला प्रशासन की रिपोर्ट में कोई मेल नहीं है।

क्या है अंतर:

वाराणसी जिला प्रशासन के अनुसार पिछले चौबीस घंटे में 503 नए मामले सामने आए हैं। जबकि राज्य सरकार कहती है कि पिछले चौबीस घंटे में वाराणसी में 587 नए कोरोना मामले आए हैं। दोनों में 84 लोगों का फर्क है। जिला प्रशासन के मुताबिक वाराणसी में पिछले चौबीस घंटे में 7 लोगों की मौत हुई है। जबकि राज्य सरकार का कहना है कि पिछले चौबीस घंटे में वाराणसी में 12 लोगों ने कोविड से जान गंवाई है। दोनों में 5 लोगों की मौत का फासला है। जिला प्रशासन के अनुसार वाराणसी में अब 7810 सक्रिय कोविड मरीज हैं। जबकि राज्य सरकार बता रही है कि वाराणसी में अब 7600 सक्रिय कोरोना संक्रमित हैं। दोनों में 210 सक्रिय मामलों का अंतर है।

सरकारी कागजों में ही कोरोना से जुड़े आंकड़े मेल नहीं खाते हैं। एक ही जिले कि रिपोर्ट में इतना अंतर, चौंकाने वाला है। इस तरह की गड़बड़ी अब आम हो चुकी है। खबर तक Media ने इसे कई बार रिपोर्ट किया है। हमने ट्विटर पर वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा और पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश से भी यह सवाल पूछा था। लेकिन इस पर कोई जवाब नहीं आया। जाहिर है लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। लोग जान गंवा रहे हैं। अव्वल तो शासन प्रशासन इन मरने वालों को कागज में भी ठीक से दर्ज नहीं कर रहे हैं।

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