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वाराणसी जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार की कोरोना रिपोर्ट अलग कैसे, आंकड़ों में भारी गड़बड़ी?

by Khabartakmedia

आंकड़े, इन्हीं के भरोसे तो सरकारें अपनी पीठ थपथपाती हैं। आंकड़ों के ही दम पर विपक्ष सरकार को घेरता है। मतलब ये एक ऐसी चीज है, जो राजनीति में किसी के भी पक्ष में जा सकता है। लगभग सारा खेल भी आंकड़ों का ही है। आंकड़ों का खेल कोरोना महामारी के दौरान भी खूब खेला गया है। पिछले साल से ही कोविड-19 संक्रमण के आंकड़ों में गड़बड़ी देखी जा रही है। कभी खबर आती है कि मौत के आंकड़ों को छिपाया जा रहा है। तो कभी कहा जाता है कि जांच के आंकड़े गलत पेश किए जा रहे हैं।

सोमवार को ऐसी ही एक गड़बड़ी वाराणसी जिले में देखने को मिली है। जिला प्रशासन हर दिन शाम 6 बजे कोरोना की रिपोर्ट जारी करता है। इस छोटे से बुलेटिन में पिछले चौबीस घंटे के संक्रमण और उससे होने वाली मौतों का आंकड़ा दिया जाता है। इसी तरह हर दिन शाम 6 बजे उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी एक रिपोर्ट जारी की जाती है। इस रिपोर्ट में पूरे उत्तर प्रदेश का आंकड़ा पेश किया जाता है। साथ ही हर जिले की भी रिपोर्ट इसमें शामिल की जाती है।

आंकड़ों में बड़ा अंतर क्यों?

आज वाराणसी जिला प्रशासन द्वारा जारी कोरोना रिपोर्ट के मुताबिक पिछले चौबीस घंटे में 1347 नए कोरोना मरीज मिले हैं। कोविड-19 के कारण तीन लोगों की मौत हुई है। साथ कुल सक्रिय मामलों की संख्या 7766 है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश सरकार की रिपोर्ट इससे एकदम अलग है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक वाराणसी में पिछले चौबीस घंटे में 1417 नए कोरोना मरीज मिले हैं। इस वायरस की वजह से केवल एक मरीज की मौत हुई है। साथ ही कुल सक्रिय मामलों की संख्या 8021 पहुंच गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट

अब ऐसी स्थिति में किस रिपोर्ट को विश्वसनीय मानी जाए? जिला प्रशासन के मुताबिक आज वाराणसी में कुल तीन मौतें हुई हैं। जबकि राज्य सरकार इसे महज एक मौत बता रहा है। जबकि दूसरी ओर जिला प्रशासन मरीजों की संख्या को राज्य सरकार के आंकड़ों से कम करके बता रहा है। जबकि दोनों रिपोर्ट आज ही के दिन शाम 6 बजे जारी किए गए हैं। दोनों ही रिपोर्ट पिछले चौबीस घंटे (11 अप्रैल की शाम 7 बजे से लेकर 12 अप्रैल की शाम 6 बजे तक) की ही रिपोर्ट दिखा रहे हैं।

वाराणसी जिला प्रशासन द्वारा जारी रिपोर्ट

स्पष्ट है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार के आंकड़ों में कोई मेल नहीं है। यह बताता है स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के बीच समन्वय किस लचर हालत में चल रही है। आंकड़ों की यह जादूगरी पिछले साल से ही चल रही है। सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन राज्य सरकार और जिला प्रशासन दोनों ने ना ही कभी इसका जवाब दिया है और ना ही इसमें सुधार किया है। जाहिर है कि इस बड़े गड़बड़ झाले के खुलासे के बाद भी प्रशासन क्या सुधार करेगा, कहा नहीं जा सकता है।

वाराणसी

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