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Central Vista Project के खिलाफ दायर याचिका खारिज, दिल्ली उच्च न्यायालय ने लगाया जुर्माना!

by Khabartakmedia

Central Vista Redevelopment Project. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सेंट्रल विष्टा प्रोजेक्ट के खिलाफ दाखिल एक याचिका को खारिज कर दिया। सोमवार को अदालत ने इस याचिका को खारिज किया। साथ ही याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने इस याचिका को ‘Motivated’ करार दिया।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की बेंच इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। बेंच ने इस याचिका को विशुद्ध जनहित याचिका नहीं माना। साथ ही अदालत ने इसे ‘Motivated’ भी बताया है। उच्च न्यायालय ने सेंट्रल विष्टा प्रोजेक्ट को जारी रखने की अनुमति दी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि यह एक “महत्वपूर्ण और आवश्यक” राष्ट्रीय परियोजना है।

किसने दाखिल की थी याचिका:

केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विष्टा प्रोजेक्ट को लेकर शुरू से ही विरोध हो रहा है। कोरोना महामारी के दूसरे लहर में इस परियोजना को बंद करने की मांग होने लगी। लेकिन इन सब के बावजूद प्रोजेक्ट को नहीं रोका गया। अरविंद केजरीवाल सरकार ने जब पूरी दिल्ली में तालाबंदी कर दिया तब इस प्रोजेक्ट को “बेहद जरूरी” कार्यों की सूची में डाल दिया गया। ताकि इसका काम किसी भी तरह से रुके नहीं।

दिल्ली उच्च न्यायालय में इस परियोजना के खिलाफ दो लोगों ने मिलकर संयुक्त रूप से याचिका दायर की थी। अन्या मल्होत्रा और सोहैल हाशमी ने यह याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि यह परियोजना एक आवश्यक कार्य नहीं है। इसलिए कुछ समय के लिए इसे रोका जा सकता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि “उन्हें कार्यस्थल पर काम कर रहे मजदूरों के सुरक्षा की चिंता है।” याचिकाकर्ता इस बात से चिंतित हैं कि संक्रमण के ख़तरे के बीच परियोजना स्थल पर बहुत सारे मजदूर काम कर रहे हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ताओं का पक्ष वकील सिद्धार्थ लूथरा रख रहे थे।

केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया:

दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार ने इस याचिका पर सवाल उठाए। केंद्र सरकार ने इस याचिका को एक एजेंडा बताया। सरकार ने कहा कि प्रोजेक्ट को रोकने के इरादे से यह याचिका दाखिल की गई है। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना स्थल पर काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा का तर्क सिर्फ एक मुखौटा है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय से मांग की थी कि इस याचिका को खारिज किया जाए और याचिकाकर्ताओं पर एक जुर्माना भी लगाया जाए।

सेंट्रल विष्टा पर विपक्ष का विरोध:

सेंट्रल विष्टा प्रोजेक्ट के लिए भारत सरकार ने 20,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। जिसके तहत दिल्ली राजपथ के कई ऐतिहासिक भवनों का पुनर्निर्माण होना है। यानी कि उन्हें दोबारा बनाया जाएगा। इसमें संसद भवन से लेकर प्रधानमंत्री आवास तक शामिल है। कोरोना संक्रमण के दौर में भी इस परियोजना का काम लगातार जारी है।

विपक्षी दल लगातार इस प्रोजेक्ट का विरोध करते आ रहे हैं। भारत के 12 बड़े विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त चिट्ठी भी लिखी थी। जिसमें इस प्रोजेक्ट पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी। विपक्षी दलों की मांग है कि सरकार
सेंट्रल विष्टा के लिए जारी किए गए फंड का इस्तेमाल कोरोना महामारी की लड़ाई में करे। 20,000 करोड़ रुपया बहुत बड़ी राशि है। इनका इस्तेमाल इस खौफनाक दौर में अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए किया जाए। पीएम को लिखी गई चिट्ठी में इस पैसे का उपयोग कोरोना वैक्सीन के लिए करने की सलाह दी गई थी।

सरकार का तर्क:

गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया जाता रहा है। इसके विरोध पर नरेंद्र मोदी सरकार बेहद स्पष्ट है। सरकार का साफ साफ कहना है कि इस प्रोजेक्ट और कोरोना माहमारी से कोई मतलब नहीं है। ना ही इस प्रोजेक्ट के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं में अड़ंगा आ रहा है। नरेंद्र मोदी सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए अलग से फंड जारी किया गया है।

“सेंट्रल विष्टा फंड का इस्तेमाल वैक्सीन खरीदने के लिए किया जाए।” विपक्ष के इस सुझाव पर नरेंद्र मोदी सरकार ने जवाब दिया है। सरकार का कहना है कि टीके के लिए अलग से 35,000 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है। इसलिए टीके की खरीद के लिए किसी प्रोजेक्ट के फंड के पैसे से कटौती करने की आवश्यकता नहीं है।

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