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BHU: पीएम के संसदीय क्षेत्र में दलित प्रोफेसर का आरोप, दलित महिला होने के कारण किया जा रहा परेशान

by Khabartakmedia

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में पिछले ही दिनों छात्रों का एक धरना समाप्त हुआ है। जिसमें मांग की गई थी कि विश्वविद्यालय को पूरी क्षमता के साथ खोला जाए। जैसा कि आम दिनों में होता है। लेकिन अब एक और धरना चालू हो गया है। इस बार मामला बेहद संवेदनशील है। विश्वविद्यालय की एक महिला प्रोफेसर ये धरना दे रही हैं। जो कि पत्रकारिता विभाग की शिक्षिका हैं। प्रोफेसर का आरोप बहुत ही संजीदा है।

महिला प्रोफेसर का नाम है डॉ. शोभना नार्लीकर। डॉ. शोभना का आरोप है कि उन्हें “जानबूझकर विभाग की विभागाध्यक्ष बनने से रोका जा रहा है। क्योंकि वो एक दलित महिला हैं।” उन्होंने आरोप लगाया है कि “पिछले तीन बार से जब भी मेरा नाम विभागाध्यक्ष के लिए आगे आता है, तब कोई न कोई नुक्स निकालकर मेरा नाम छांट दिया जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसा जानबूझकर कर रहा है।”
प्रो. शोभना के मुताबिक वो पिछले 19 सालों से विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।

क्या है दिक्कत?

प्रो. शोभना नार्लीकर का कहना है कि नियमित उपस्थिति के बावजूद उन्हें साल 2013 से अभी तक लीव विदाउट पे (LWP) दिखाया जा रहा है। जबकि उन्होंने अपनी सेवा पूरी तरह से दी है और वेतन भी उठाई है। यहीं मामला फंसा हुआ है। महिला प्रोफेसर के अनुसार “ये सब इसलिए किया जा रहा है कि मेरा एकेडमिक रिकॉर्ड खराब हो जाए और मैं अपने विभाग की विभागाध्यक्ष ना बन सकूं।”

प्रो. शोभना इसकी शिकायत लेकर बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय (Central Office) पहुंची थीं। वे केंद्रीय कार्यालय के अवकाश विभाग गईं। जहां सेक्शन ऑफिसर सुरेन्द्र मिश्रा मौजूद थे। प्रो. शोभना का कहना है कि “यहां सुरेंद्र मिश्रा ने उनकी बात नहीं सुनी। साथ ही अपमानजनक ढंग से व्यवहार भी किया।” इसी बात से नाराज़ प्रो. शोभना नार्लीकर केंद्रीय कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गई हैं। उन्होंने कहा है कि जब तक इस मामले में कार्रवाई नहीं होगी तब तक धरने पर बैठी रहेंगी।

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