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कोरोना के बीच किसान आंदोलन ने पूरा किया छह महीना, किसानों ने मनाया काला दिवस!

by Khabartakmedia

Farmers Protest. 26 मई, 2021 का दिन ऐतिहासिक बन गया है। इस तारीख को दशकों और शायद सदियों तक याद रखा जाएगा। बुधवार को किसान आंदोलन ने छह महीने का समय पूरा कर लिया। यानी कि आज किसान आंदोलन को शुरू हुए छह माह हो गए। इस मौके पर किसानों ने देशभर में काला दिवस मनाया। किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने आज काला दिवस मनाने का ऐलान पहले ही कर दिया था।

देशभर के किसानों ने आज अपने घरों, गाड़ियों व अन्य जगहों पर काला झंडा फहराया। हरियाणा और पंजाब में मार्च हुए और कई जगह किसानों ने पुतले भी जलाए। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि “हम लोग आज शक्ति प्रदर्शन नहीं करना चाहते। क्योंकि कोरोना की महामारी चल रही है। लेकिन Covid-19 प्रोटोकॉल्स के तहत एक सांकेतिक प्रदर्शन किया जा रहा है।”

किसानों के काला दिवस मनाए जाने को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है। अखिलेश यादव ने अपनी ट्वीट में एक शेर लिखा है। साथ ही कहा है कि “भाजपा सरकार के अहंकार के कारण आज देश में किसानों के साथ जो अपमानजनक व्यवहार हो रहा है उससे देश का हर नागरिक आक्रोशित है। हमारे हर निवाले पर किसानों का कर्ज है।”

खबर लिखे जाने तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने किसानों के काला दिवस को लेकर कोई ट्वीट नहीं किया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत पूरी कांग्रेस पार्टी इस आंदोलन की समर्थक रही है।

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन:

किसानों का यह छह महीने पुराना आंदोलन तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हो रही है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल ही नए कृषि कानून लाए थे। इन्हीं तीन कृषि कानूनों का विरोध हो रहा है। किसानों का मानना है कि ये कानून भविष्य में कृषि क्षेत्र को पूरी तरह निजी हाथों में सौंप देंगे। जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि ये कानून कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए लाए गए हैं। केंद्र सरकार की मानें तो इनके लागू होने के बाद किसानों की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आएगा।

किसानों और सरकार के बीच इस खींचतान की सबसे बड़ी वजह है न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)। किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार भारत के सभी किसानों को एमएसपी की संवैधानिक गारंटी दे। जबकि नरेंद्र मोदी सरकार का कहना है कि कृषि कानूनों से एमएसपी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। केंद्र सरकार और खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते रहे हैं कि एमएसपी से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। लेकिन सरकार एमएसपी की लिखित गारंटी देने पर कुछ नहीं बोलती है। अब सवाल ये है कि अगर सरकार एमएसपी से छेड़छाड़ नहीं करेगी तो इस बात की लिखित गारंटी देने में क्या हर्ज है?

बैठक हुई, नहीं बनी बात:

किसान नेताओं और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच इन मुद्दे पर कई बार बैठकें हुईं। दस से ज्यादा बार वार्ता हुई। लेकिन दोनों पक्ष किसी समाधान पर नहीं पहुंच सके। सरकार और किसानों के बीच कोई साझी जमीन तैयार नहीं हो पाई। अब तक इस किसान आंदोलन में सैकड़ों किसानों की मौत भी हो चुकी है। लेकिन केंद्र सरकार इन बातों को अनसुना करती रही है।

कोरोना वायरस महमारी के बीच भी किसान आंदोलन जारी है। दिल्ली की अलग अलग सीमाओं पर किसानों का जमावड़ा है। आंदोलनकारी किसानों का साफ कहना है कि जब तक नरेंद्र मोदी सरकार उनकी मांगें नहीं मानती तब तक ये आंदोलन चलता रहेगा। लेकिन महामारी के खौफनाक मंजर को देखते हुए इस सवाल को हल करना बेहद जरूरी है। फिलहाल भारत में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। खौफनाक मंजर हर तरफ है। अब तीसरे लहर के आने की चर्चा भी हो रही है। ऐसे में किसान आंदोलन में इकट्ठे किसानों के लिए यह बेहद ख़तरनाक साबित हो सकता है। बहरहाल केंद्र सरकार इस मुद्दे को नजरंदाज करती हुई दिख रही है। लेकिन देखना होगा कि किसान आंदोलन का भविष्य कैसा होने वाला है?

सोशल मीडिया की बहस:

आज पूरे दिन सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन और काला दिवस को लेकर बहस छिड़ी रही। लाखों लोगों ने इस पर पोस्ट किए हैं। ट्विटर पर दिन पर #काला_दिवस और #BlackDay ट्रेंड करता रहा। जबकि दूसरी ओर इसका विरोध भी देखने को मिला। कोरोना मह्मारी में भी हो रही आंदोलन पर लोगों ने सवाल उठाए। इस बीच एक हैशटैग ट्रेंड करता हुआ दिखा। #SuperSpreaderDakait. इसी हैशटैग के साथ करीब पचास हजार से ज्यादा लोगों ने ट्वीट किया है।

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