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राजस्थान: जन्मदिन की बधाई देते हुए अनुच्छेद-18 की बातें भूल गईं भाजपा विधायक दीप्ति माहेश्वरी?

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BJP MLA Deepti Kiran Maheshwari and Sawai Padmnabh Singh

Rajasthan. यूं तो हिंदुस्तान को स्वतंत्र हुए सत्तर साल से अधिक हो चुका है। भारत में संविधान लागू हुए भी सत्तर साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है। लेकिन अभी भी बहुत से लोग अपनी सामंती मानसिकता से आजाद नहीं हो सके हैं। अभी भी बहुत से लोग संविधान की मूल भावना “समानता” को अपने भीतर लागू नहीं कर सके हैं। राजस्थान की एक विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने इन बातों को सही साबित कर दिया है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने गत शनिवार यानी 3 जुलाई को एक ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने जयपुर एक शख्स को जन्मदिन की बधाई दी। साथ ही उसकी फोटो भी शेयर की। राजस्थान के राजसमंद से विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने लिखा कि:
“जयपुर के महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह जी को जन्मदिवस की बधाई व शुभकामनाएं। ईश्वर आपको सदैव उत्तर स्वास्थ्य व दीर्घायु प्रदान करे।”

ये ट्वीट पढ़कर पहली नजर में ऐसा लगेगा की दिक्कत कहां है? किसी की फोटो शेयर कर उसे जन्मदिन की बधाई देना तो रिवाज ही है। तो इस ट्वीट को दुबारा पढ़िए। ये ट्वीट लिखते वक्त दीप्ति किरण माहेश्वरी भारतीय संविधान का एक जरूरी अनुच्छेद भूल गईं। अनुच्छेद-18.

क्या कहता है अनुच्छेद-18:

भारतीय संविधान का अनुच्छेद-18 “उपाधियों के अंत” से जुड़ा हुआ है। संविधान के भाग-3 का अनुच्छेद-18 किसी भी तरह के उपाधि के इस्तेमाल पर रोक लगाता है। राजा, महाराजा, महारानी, सुल्तान, राज बहादुर आदि जैसे उपाधियों की समाप्ति से जुड़ा है अनुच्छेद-18.

सवाई पद्मनाभ सिंह को जन्मदिन की बधाई देते हुए भाजपा विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने इस बात नजरंदाज किया। उन्होंने अपने ट्वीट में सवाई पद्मनाभ सिंह के नाम से पहले महाराजा शब्द का इस्तेमाल किया। जो कि एक उपाधि है।

राजा-महाराजा जैसी उपाधियां राजशाही व्यवस्था की देन थीं। लेकिन भारत में लोकतंत्र है। लोकतंत्र में हर व्यक्ति एक समान है। भारतीय संविधान समानता की बात कहता है। राजा-महाराजा जैसे शब्द ऊंच-नीच की भावना के वाहक हैं। किसी जनप्रतिनिधि द्वारा ऐसे शब्दों का इस्तेमाल लोकतांत्रिक भावनाओं और देश के संविधान का मजाक है।

लोगों ने लगाई क्लास:

भाजपा विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी के इस ट्वीट पर उन्हें लोगों का गुस्सा झेलना पड़ रहा है। लोगों ने जमकर दीप्ति किरण माहेश्वरी की लानत मलामत की है। ट्विटर पर ही उन्हें संविधान का पाठ पढ़ाया जा रहा है।

अर्जुन महर नाम के एक व्यक्ति ने लिखा कि “लोकतंत्र स्थापित हो गया है। लेकिन सामंती सोच अभी भी खत्म नहीं हुई है। दीप्ति किरण माहेश्वरी जी, संविधान लागू होते ही इस तरह की सभी उपाधियों को खत्म कर दिया गया था…! आप संविधान के आर्टिकल 18 का उल्लंघन कर रही हैं…!”

प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने लिखा कि “क्या अब भी 2021 में भारत पर राजा राज कर रहे हैं?”

रोहित यादव ने लिखा कि “जिस संविधान का उपयोग कर आप नेता बनी हैं उस संविधान का अनुच्छेद 18 पढ़ लो जिसमें उपाधियों का अंत हो चुका है।”

कौन हैं पद्मनाभ सिंह:

जिस सवाई पद्मनाभ सिंह को भाजपा विधायक दीप्ति ने महाराजा कहकर जन्मदिन की बधाई दी आखिर वो हैं कौन? सवाई पद्मनाभ सिंह राजस्थान के जयपुर के हैं। पद्मनाभ सिंह की उम्र महज 22 साल है। ये जयपुर के राजघराने के लाडले हैं।

जयपुर की स्थापना 1727 में सवाई जय सिंह द्वितीय ने की थी। तब यह भारत के सबसे बड़े रजवाड़ों में से एक था। यहां कच्छावां वंश के राजपूतों का शासन रहा। जिसके वंशज हैं पद्मनाभ सिंह।

पद्मनाभ सिंह नरेंद्र सिंह और दिया कुमारी के बड़े लड़के हैं। दिया कुमारी राजस्थान के सवाईमाधोपुर से भाजपा की सांसद भी हैं। दिया कुमारी के पिता थे भवानी सिंह। 2002 में भवानी सिंह ने पद्मनाभ सिंह को गोद लिया। साथ ही उन्हें अपना उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया। भवानी सिंह के मृत्यु के बाद सवाई पद्मनाभ सिंह ही उनकी विरासत संभाल रहे हैं।

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