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भूपिंदर सिंह मान ने सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को कहा अलविदा, हुई किसकी फजीहत?

by Khabartakmedia

देश का सर्वोच्च न्यायालय पिछले दो महीनों से चल रहे किसान आंदोलन को लेकर परेशान है। सुप्रीम कोर्ट सड़क पर बैठे किसानों का मसला सुलझाना चाहता है। उसने इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू की। केंद्र सरकार के वकीलों और किसान के वकीलों की बातें सुनी। फिर एक आदेश दिया। आदेश ये कि जब तक कोर्ट अगला आदेश पारित नहीं करता तब तक कृषि कानूनों को लागू नहीं किया जा सकेगा। लोगों ने इसे किसानों के जीत के तौर पर देखा। लेकिन जल्दबाजी ठीक नहीं होती। खैर, सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ओर से एक चार सदस्यों वाली समिति का गठन किया। समिति को काम दिया गया है कि वो किसानों से बातचीत करे और सीधे अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपे। हालांकि कमेटी के सक्रिय होने से पहले ही इसके एक सदस्य ने अपना नाम वापस ले लिया है। गुरुवार को भूपिंदर सिंह मान नाम के एक सदस्य ने आदर के साथ खुद को ‘सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित’ इस कमेटी से अलग कर लिया। भूपिंदर मान ने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा है कि वे किसानों और पंजाब के साथ हमेशा खड़े हैं।

सुप्रीम द्वारा गठित समिति के चारों सदस्य

उठ रहे थे विश्वसनीयता पर सवाल:

गौरतलब है कि जब से सुप्रीम कोर्ट की यह कमेटी अपने अस्तित्व में आई है तभी से सवालों के घेरे में है। इस समिति में भूपिंदर सिंह मान के अलावा अनिल घनवत, अशोक गुलाटी और प्रमोद कुमार जोशी शामिल हैं। इन चारों लोगों ने अब तक खुले तौर पर केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों का समर्थन किया है। यही वजह थी कि लोग इन चारों की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे थे। हालांकि अब भूपिंदर सिंह मान ने किसानों के समर्थन में खड़े रहने की बात कहकर अपना नाम वापस ले लिया है।
देश के उच्चतम न्यायालय द्वारा बनाई गई किसी समिति में किसी व्यक्ति का नाम होना कोई साधारण बात नहीं है। लेकिन ऐसे में एक शख्स ऐसे मौके को ठुकरा दे तो कई सवाल हवा में तैरने लगते हैं! सवाल और जवाब पाठक तय करें।

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