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Home न्यायालय अमर उजाला की खबर पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिया नोटिस, यूपी पंचायत चुनाव पर कही ये बात!

अमर उजाला की खबर पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिया नोटिस, यूपी पंचायत चुनाव पर कही ये बात!

by Khabartakmedia

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दैनिक अख़बार अमर उजाला की एक खबर पर न्यायिक नोटिस लिया है। अमर उजाला की जिस खबर पर अदालत ने नोटिस ली है, वो उत्तर प्रदेश में चल रही पंचायत चुनावों पर थी। खबर में दिखाया गया था कि किस तरह यूपी में पंचायत चुनावों के दौरान चुनाव में लगे कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयोग से इस पर जवाब भी मांगी है। राज्य निर्वाचन आयोग को बताना होगा कि अब तक हुए चुनावों में कोरोना संबंधी दिशा निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ?

इलाहबाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य चुनाव आयोग अगले चरण के चुनावों में कोविड प्रोटोकॉल्स का पूरी तरह पालन कराए। चुनाव आयोग को सुनिश्चित करना होगा कि चौथे चरण के मतदान में मास्क, शारीरिक दूरी और सेनेटाइजर के नियमों का कड़ाई से पालन हो। अगर इन नियमों में ढील पाई गई तो अदालत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश भी दे सकता है।

क्या है अमर उजाला की खबर:

अमर उजाला ने 25 अप्रैल को एक खबर छापी थी। जिसके अनुसार उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं और अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। खबर के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अब तक 135 शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है।

अमर उजाला की इस खबर को सोशल मीडिया पर खूब साझा किया गया। राज्य निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश सरकार की लापरवाहियों पर लोगों ने सवाल भी उठाए। जब कोरोना महामारी के कारण पूरे उत्तर प्रदेश की स्थिति खराब है, लोग मर रहे हैं तब चुनाव कराने पर भी सवाल उठे। लेकिन ना राज्य चुनाव आयोग को और ना ही योगी आदित्यनाथ सरकार को ये महामारी दिखी। दोनों ने मिलकर शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और अन्य वर्ग के लोगों को इस चुनाव में झोंक दिया। जिसका परिणाम अब भुगतने को मिल रहा है।

देखने वाली बात होगी कि राज्य निर्वाचन आयोग अदालत में क्या जवाब देता है? उसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय क्या फैसला लेता है? न्यायालय ने आज साफ कहा है कि ऐसा लगता है कि ना ही पुलिस ने और ना ही राज्य निर्वाचन आयोग ने, चुनाव की ड्यूटी में लगे लोगों को इस ख़तरनाक वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए कदम उठाया।

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