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30 अप्रैल तक बन जाएगी गांव की सरकार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय का सख्त आदेश!

by Khabartakmedia

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर सख्त आदेश जारी किया है। पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैए से अदालत ने नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा है कि 30 अप्रैल तक प्रधान का चुनाव पूरा कराया जाए। जबकि जिला पंचायत सदस्य और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव 15 मई तक कराने को कहा गया है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जस्टिस एमएन भंडारी और जस्टिस आरआर अग्रवाल की बेंच ने विनोद उपाध्याय की याचिका पर यह आदेश दिया है। बता दें कि विनोद उपाध्याय ने हाई कोर्ट में पंचायत चुनावों की देरी पर संविधान की अवहेलना को लेकर याचिका दायर किया था। हर पांच साल में पंचायत चुनाव कराया जाए, इसका प्रावधान संविधान में है। इसके मुताबिक जनवरी, 2020 तक पंचायत चुनाव हो जाने थें। लेकिन राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने देरी की।

वाराणसी के सेवापुरी गांव के प्रधान पद प्रत्याशी का इंटरव्यू:

याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था। सरकार ने कोरोना महामारी को इस देरी का कारण बताया है। चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग ने मतदाता सूची और परिसीमन का काम जनवरी महीने में ही समाप्त कर लिया है। लेकिन सीटों का आरक्षण राज्य सरकार को तय करना है। जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया है।

चुनाव आयोग ने अपनी ओर से एक चुनावी तारीख अदालत में पेश किया। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “30 अप्रैल तक ग्राम प्रधान और 15 मई तक जिला पंचायत सदस्य तथा ब्लॉक प्रमुख के चुनाव संपन्न कराए जाएं।” चुनाव आयोग ने आज न्यायालय को बताया है कि आरक्षण के फैसले के बाद 45 दिन का समय लगेगा चुनाव कराने में।

बता दें कि पंचायत चुनावों को लेकर प्रदेश में खासा ऊहापोह की स्थिति है। प्रत्याशी खुलकर प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि अब तक सीटों के आरक्षण पर योगी सरकार ने सूची जारी नहीं की है। ऐसे में उम्मीदवारों को आशंका है कि सीट पर तय आरक्षण के कारण वे चुनावी मैदान से बाहर भी हो सकते हैं। ऐसा में इनका सारा प्रचार बेकार चला जाएगा।

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