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ममता बनर्जी ने अब क्या खेला कर दिया? ताकती रह गई मोदी सरकार!

by Khabartakmedia
NARENDRA MODI and MAMATA BANERJEE

West Bengal. केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव रुकने का नाम नहीं ले रही है। ऐसा लग रहा है जैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच कोई होड़ लगी है। एक दूसरे पर राजनीतिक बढ़त बनाने की। लेकिन वाकई ऐसे कोई रेस चल रही है तो यह दूसरा मौका है जब नरेंद्र मोदी को ममता बनर्जी से मुंह की खानी पड़ी है। पहला मौका पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव था। अब पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को लेकर शुरू हुआ विवाद दूसरा मौका बना है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अलपन बंद्योपाध्याय को अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त किया है। बंद्योपाध्याय अब तक पश्चिम बंगाल के राज्य मुख्य सचिव थे। लेकिन मोदी और ममता के बीच हुए Cyclone Yaas की समीक्षा बैठक से जन्में विवाद के बाद केंद्र सरकार ने उन्हें नोटिस भेजा था। केंद्र सरकार ने अलपन बंद्योपाध्याय को बंगाल से दिल्ली बुलाया था। यानी कि उन्हें पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव के पद से हटाने का फैसला किया गया था।

हालांकि केंद्र सरकार के इस फैसले पर ममता बनर्जी ने नाराजगी जाहिर की थी। ममता बनर्जी ने साफ कहा था कि अलपन बंद्योपाध्याय को पश्चिम बंगाल सरकार से नहीं हटाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बाबत एक चिट्ठी भी लिखी थी। सीएम ने पीएम से केंद्र सरकार के इस फैसले को वापस लेने की अपील की थी।

अलपन बंद्योपाध्याय (फ़ाइल फोटो)

पूरा घटनाक्रम समझिए:

पश्चिम बंगाल याद Cyclone से प्रभावित है। राज्य के कुछ जिलों में भयानक क्षति पहुंची है। इसी स्थिति की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 मई को पश्चिम बंगाल गए थे। बैठक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ होनी थी। लेकिन इस बैठक में ममता बनर्जी लगभग आधे घंटे की देरी से पहुंची। इसके बाद ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को एक रिपोर्ट सौंपी। फिर समीक्षा बैठक खत्म होने से पहले ही वो उठकर चली गईं। इस पूरे उठक बैठक और आवागमन के दौरान ममता बनर्जी के साथ अलपन बंद्योपाध्याय भी मौजूद थे। बंद्योपाध्याय भी ममता बनर्जी के साथ देरी से आए और फिर तुरंत उनके साथ ही चलते बने।

इसे लेकर राजनीतिक हलचल शुरू हो गई। भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी की खूब आलोचना की। माना गया कि ममता बनर्जी के इस रवैए पर नरेंद्र मोदी सरकार काफी आहत हुई थी। इसी की प्रतिक्रिया में केंद्र सरकार ने अलपन बंद्योपाध्याय को दिल्ली आने के लिए बुलावा भेजा था।

नहले पर दहला:

सोमवार यानी आज ही अलपन बंद्योपाध्याय का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। लेकिन केंद्र सरकार ने तीन महीने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया। लेकिन इस बीच यह नया बखेड़ा पैदा हो गया। अलपन बंद्योपाध्याय के पास दो विकल्प मौजूद था। पहला कि वो इस्तीफा दे दें। दूसरा कि वो केंद्र सरकार की बात मानकर दिल्ली चले जाएं। कहा जाता है कि अलपन बंद्योपाध्याय ममता बनर्जी के बेहद खास अधिकारी रहे हैं। तो उन्होंने पहला विकल्प चुना। बंद्योपाध्याय ने अपना इस्तीफा सौंप दिया।

इस्तीफा देने के साथ ही ममता बनर्जी ने उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया। अलपन बंद्योपाध्याय को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त कर दिया। राजनीतिक टिप्पणीकारों का मानना है कि ममता बनर्जी ने एक बार फिर खेला कर दिया है। इस सियासी दांवपेच में ममता बनर्जी नरेंद्र मोदी पर फिर भारी पड़ गई हैं।

देखना होगा कि ये विवाद कब आखिरी सांस लेता है? मोदी और ममता के बीच चल रहा शतरंज का खेल कब समाप्त होता है?

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