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Home महत्वपूर्ण दिवस 26 जनवरी को कौन मना रहा है “काला दिवस” के रूप में, हिन्दू राष्ट्र की मांग वाली चिट्ठी राष्ट्रपति को भेजी!

26 जनवरी को कौन मना रहा है “काला दिवस” के रूप में, हिन्दू राष्ट्र की मांग वाली चिट्ठी राष्ट्रपति को भेजी!

by Khabartakmedia

जब पूरा भारत 26 जनवरी को उत्सव मना रहा था। जब देशवासी अपने गणतंत्र की 72 वीं सालगिरह मना रहे थे। तभी एक ऐसा भी कुनबा था जो मंगलवार को “काला दिवस” मना रहा था। अखिल भारत हिन्दू महासभा ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस नहीं मनाया बल्कि इसे “काला दिवस” बताया। महासभा के कार्यकर्ताओं ने भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक ज्ञापन भी लिख भेजी है। राष्ट्रपति से यह अपील की गई है कि वे भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दें।

पत्र का पृष्ठ-1

अखिल भारत हिन्दू महासभा मेरठ के कार्यकर्ताओं ने 25 जनवरी की शाम भारत के राष्ट्रपति को एक पत्र भेजा। पत्र के सबसे ऊपरी फलक पर लिखा है, “राजनीति का हिन्दूकरण एवं हिन्दूओं का सैनिकीकरण और सैनिकों का आधुनिकीकरण राष्ट्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है।” तो वहीं पत्र के सबसे निचले छोर पर लिखा है कि “अखण्ड हिन्दू राष्ट्राभिमानी अमर हुतात्मा पण्डित नाथूराम गोडसे अमर रहें।”

पत्र का पृष्ठ-2

अखिल भारत हिन्दू महासभा के इस ज्ञापन का विषय है “भारतीय संविधान के धर्म निरपेक्ष स्वरूप को निरस्त करना।” संगठन ने लिखा है कि आज से 70-71 साल कुछ सत्तालोलूपों ने भारत को छद्म धर्मनिरपेक्ष संविधान प्रदान किया। इस तरह उन लोगों ने विदेशी ताकतों के षड्यंत्र का साथ दिया। जबकि तीन साल पहले ही 1947 में देश का विभाजन धर्म के आधार पर हो गया था। जिसके बाद मुसलमानों को पाकिस्तान और हिन्दूओं को “हिन्दुस्थान” मिला था। भारत धर्मनिरपेक्षता के छल प्रपंच में फंसकर विधर्मियों और आतंकियों की शरणगाह बन गया है।

पत्र का पृष्ठ-3

ज्ञापन में कहा गया है कि आज भी देश में ऐसे नेता हैं जो राष्ट्र के टुकड़े टुकड़े करना चाहते हैं। ऐसे नेताओं को उनके “परिवार” समेत राष्ट्र की सीमा से बाहर फेंक देना चाहिए। अखिल भारत हिन्दू महासभा ने राष्ट्रपति से अपील की है कि वे आज के “काले दिन पर वर्तमान संविधान को निरस्त कर देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करें।” उनका मानना है कि ऐसा करने पर इतिहास में यह फैसला स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा।
ज्ञापन के आखिर में संगठन के पंडित अशोक शर्मा का हस्ताक्षर है। इसके अलावा भरत राजपूत (मेरठ महानगर अध्यक्ष), अभिषेक अग्रवाल (जिला अध्यक्ष, मेरठ), शानू गोयल, नरेंद्र गुप्ता (उपाध्यक्ष, यूपी), अरविंद पंडित, नवीन राजपूत, राम सिंह, ब्रज मोहन, गोपाल और ऋषि कुमार के भी हस्ताक्षर हैं।

इस ज्ञापन की व्याख्या किस तरह से की जाए यह पाठक अपनी जिम्मेदारी समझें और जरूर बताएं। लेकिन सवाल उठता है कि खुले तौर पर ऐसी मांग करने वालों पर सरकार कोई कार्रवाई क्यों नहीं करती? क्योंकि ये महज एक मांग नहीं है बल्कि देश को सांप्रदायिक आग में झोंक देने की मानसिकता है। हालांकि ये उसी संविधान की देन है कि कोई भी व्यक्ति देश के राष्ट्रपति को भी ऐसा ज्ञापन भेज सकता है।

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