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BHU के स्थाई कुलपति की नियुक्ति के लिए एबीवीपी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र!

by Khabartakmedia

छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा है। एबीवीपी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की ओर से यह पत्र लिखा गया है। राष्ट्रपति को लिखे इस पत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति का मुद्दा उठाया गया है। एबीवीपी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से यह अपील की है कि बीएचयू के स्थायी कुलपति की नियुक्ति की जाए। एबीवीपी ने अपने पत्र की एक कॉपी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को भी भेजी है।

मार्च से कार्यवाहक कुलपति के जिम्मे है बीएचयू:

बता दें कि 28 मार्च, 2021 से ही बीएचयू में कुलपति का कार्यालय खाली है। प्रो. राकेश भटनागर के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद खाली हो गया था। फिलहाल बीएचयू एक कार्यवाहक कुलपति के नेतृत्व में चल रहा है। एबीवीपी ने राष्ट्रपति कोविंद को लिखा है कि “काशी हिन्दू विश्वविद्यालय अधिनियम 1915 के अंतर्गत आप कुलपति के नियुक्ति के अधिकारी हैं।” एबीवीपी ने यह भी लिखा है कि बीएचयू जैसे देश के शीर्षस्थ विश्वविद्यालय में लंबे समय तक स्थायी कुलपति का न होना विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास एवं सुचारू संचालन में बाधा बन सकता है।

चल है कोरोना मरीजों का इलाज:

गौरतलब है कि बीएचयू में इस वक्त कोरोना के मरीजों का इलाज हो रहा है। एबीवीपी ने कहा है कि ऐसी मुश्किल परिस्थिति में स्थाई कुलपति का होना बेहद जरूरी है। ताकि सारी व्यवस्था ढंग से चल सके।

बीएचयू के एबीवीपी के संयोजक अधोक्षज पांडेय ने कहा है कि, “काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति का कार्यकाल दिनांक 28 मार्च 2021 को खत्म हो गया। जिसके कारण कुलपति नियुक्ति न होने पर विश्वविद्यालय के रेक्टर को कार्यवाहक कुलपति का दायित्व सौंपा गया है। वर्तमान समय में विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन हेतु एक स्थायी कुलपति की अत्यंत आवश्यकता है।”

एबीवीपी बीएचयू के सह संयोजक अभय प्रताप सिंह ने कहा कि, “काशी हिन्दू विश्वविद्यालय देश के विद्यार्थियों के लिए किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का बड़ा केंद्र है। जहाँ आईआईटी और आईएमएस जैसे संस्थान हैं। वर्तमान समय में विश्वविद्यालय अपना सामाजिक दायित्व निभाते हुए कोरोना मरीजों के इलाज का एक बड़ा केंद्र भी बना है। विश्वविद्यालय में बहुत से विकास कार्य होने हैं जो एक स्थायी कुलपति के बिना नहीं हो सकते।”

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