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हरियाणा के किसान ने कृषि कानून के खिलाफ की आत्महत्या, और कितनी जान लेगी सरकार?

by Khabartakmedia

किसान आंदोलन में रविवार को एक और किसान ने अपने जान दे दी। केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन करते हुए इस किसान ने शहादत दे दी है। हरियाणा के हिसार जिले के सिसाय गांव के राजवीर सिंह ने कृषि कानूनों के विरोध में आत्महत्या कर ली है। राजवीर सिंह की उम्र पचास साल बताई जा रही है। उन्होंने मरने से पहले एक चिट्ठी लिख छोड़ी है। इस चिट्ठी के अंत में राजवीर सिंह ने लिखा है कि “चाहे मेरी लाश सड़क पर रख दो लेकिन तीनों काले कानून वापस करा के और एमएसपी की गारंटी लेकर ही घर वापस लौटना, मेरे किसान भाइयों।”

राजवीर सिंह ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि “सिसाय से पहली शहादत।” इसके बाद वो लिखते हैं कि “सरकार से मेरी हाथ जोड़कर विनती है कि मरने वाले की आखिरी इच्छा पूरी की जाती है। मेरी आखिरी इच्छा है कि ये तीनों कृषि कानून वापस लिए जाएं और खुशी से किसानों को घर भेज दें।” भगत सिंह का जिक्र करते हुए राजवीर सिंह ने लिखा है कि “भगत सिंह ने देश के लिए जान दे दी। हम अपने किसान भाइयों के लिए जान दे रहे हैं।” उन्होंने किसानों से अपील की है कि “मेरी ये शहादत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए मेरे किसान भाइयों।”

चुनावी महीना और किसान आंदोलन:

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन ने अपने सौ दिन भी पूरे कर लिए हैं। किसान पिछले सौ दिनों से दिल्ली की सीमाओं और अलग अलग जगहों पर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले ले। साथ फसलों के लिए सभी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की संवैधानिक गारंटी दे।

आंदोलन की शुरुआत में सरकार और किसान नेताओं के बीच कई दौर की वार्ता भी हुई। लेकिन दोनों पक्षों में बात नहीं बन सकी। किसानों का मानना है कि ये कानून काले हैं और खेती को निजी हाथों का खिलौना बनाने वाले हैं। जबकि सरकार इसे किसान हित में दिखाने की भरपूर कोशिश कर रही है। हालांकि अब भाजपा सरकार ने इस मुद्दे पर बात करना भी छोड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फिलहाल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में व्यस्त हैं। सैकड़ों की संख्या में किसान आंदोलन के दौरान किसानों की मौत अलग-अलग कारणों से हो चुकी है। लेकिन इस ओर सरकार का ध्यान बिल्कुल भी नहीं है।

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